माता और परिजनों के साथ लापता गोपाल सिंह बीच में काली जैकेट में
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मकर संक्रांति का दिन तहसील के सुदूरवर्ती ढकुना गांव निवासी 65 वर्षीय कुंती देवी के लिए बड़ी खुशी लेकर आया। आठ साल पहले लापता हुआ उनका बड़ा बेटा इस दिन सकुशल घर लौट आया। बरेली के मनोवैज्ञानिक, समाजसेवी शैलेश शर्मा जैसे ही उनके लापता बेटे गोपाल सिंह को लेकर ढकुना गांव पहुंचे तो परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मां ने जब बेटे को सकुशल आंखों के सामने पाया तो उन्होंने जिगर के टुकड़े को सीने से लगा लिया। गोपाल की पत्नी और बच्चे भावुक हो गए। इस बीच गोपाल की बड़ी बेटी का विवाह भी हो चुका है।
शैलेश शर्मा बरेली में मनोसमर्पण मनोसामाजिक सेवा समिति चलाते हैं। उन्होंने बताया कि संस्था सड़कों पर बेसहारा, असहाय भटकने वाले लोगों के लिए कार्य करती है। उन्हें गोपाल दिल्ली की सड़कों पर बदहवास हालत में घूमते नजर आए, वह उन्हें अपने घर ले आए।
उन्हें कुछ भी होश नहीं था। उन्होंने गोपाल सिंह को मुंबई के श्रद्धा पुनर्वासन संस्था में भर्ती कराया, जहां उनका मानसिक उपचार किया गया। गोपाल ठीक हुए तो उन्होंने अपने घर परिवार की जानकारी दी। गोपाल के बताए पते पर ही शैलेश शर्मा उन्हें मकर संक्रांति को ढकुना गांव छोड़ने पहुंचे तो आठ साल से लापता बेटे की उम्मीद खो बैठे परिजनों और ग्रामीणों में खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गोपाल की माता के अलावा पत्नी पुष्पा देवी, दोनों बेटियां भावना और ललिता भावुक हो गईं। पुत्र रवि भी पिता को टकटकी लगाकर देखता रहा। शैलेश शर्मा ने बताया कि गोपाल के लिए आगे भी जो मदद हो सकेगी वह पूरा सहयोग करेंगे।
भाई देवेंद्र बोले, फरिश्ते से कम नहीं शैलेश शर्मा
रानीखेत। गोपाल के भाई 40 वर्षीय देवेंद्र सिंह ने बताया कि आठ साल पहले गोपाल सिंह अचानक गायब हो गए थे, तमाम स्थानों पर तलाश के बावजूद उनका कहीं सुराग नहीं लगा। उनके वापस आने की उम्मीद खत्म हो गई थी। इस बीच गोपाल सिंह की बड़ी बेटी भावना का विवाह भी हुआ। उन्होंने भाई को सही सलामत घर लाने के लिए शैलेश शर्मा का आभार जताया। कहा कि शैलेश उनके लिए फरिश्ते से कम नहीं हैं। फिलहाल गोपाल सिंह की हालत ठीक है। दवाइयां चल रही हैं। उन्होंने बताया कि उनका भाई शैलेश जी को पिछले साल दिवाली के आसपास दिल्ली में घूमता हुआ मिला था।