रिस्कन घाटी के ग्रामीणों का आंदोलन जारी है। सात किमी दूर से पैदल चलकर आंदोलन स्थल पहुंची महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। इधर आंदोलनकारियों के एक शिष्टमंडल ने रानीखेत जाकर एसडीएम से भी वार्ता की। आंदोलनकारियों का कहना है कि सम्मानजनक समझौते पर ही वे मानेंगे।
17वें दिन ललित प्रसाद और योगेश कुमार क्रमिक अनशन पर बैठे। उन्होंने प्रशासन पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि वे प्रशासन के बरगलाने में नहीं आएंगे। सभी मांगें मानी जाने पर ही आंदोलन को खत्म करेंगे।
धरना देने वालों में खिमुली देवी, कमला देवी, विमला देवी, रमा देवी, ललिता देवी, डिंपल, बेबी, हेमा, शांति देवी, कमला देवी, देवकी देवी, आनंदी देवी, दान सिंह, पान देव, हरवंश बिष्ट, जगदीश बुधानी, प्रकाश कांडपाल, घनानंद कांडपाल, जीवन सिंह, नवीन कांडपाल, गिरधर कांडपाल शामिल थे।
मालूम हो कि ग्रामीण रिस्कन घाटी संघर्ष समिति के बैनर तले पैठानी, सिमलगांव घुने, सिमलगांव, तल्ली बिठोली, कांडे, बाड़ी, बनोली, गुप्टली, रणां, बेढुली, वलना, नाड़ आदि गांवों की समस्याओं को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
रिस्कन घाटी के ग्रामीणों का शिष्टमंडल एसडीएम एपी बाजपेयी से मिला। शिष्टमंडल में शामिल दिनेश तिवारी ने फोन पर बताया कि एसडीएम एपी वाजपेयी से संघर्ष समिति की वार्ता हुई। इस दौरान उन्होंने कुछ मांगों पर संशोधन किया है और अधिकांश मांगें मान ली हैं।
एसडीएम वाजपेयी बृहस्पतिवार को 11 बजे आंदोलन स्थल पर आकर स्वीकृत मांगों को आंदोलनकारियों के सामने रखेंगे। इसके बाद आंदोलन के भविष्य पर विचार होगा। शिष्टमंडल में हरीश जलाल, दिनेश तिवारी और नवीन कांडपाल शामिल थे।