एक तरफ पूरे जाड़े के सीजन में बारिश नहीं हुई है जिससे असिंचित क्षेत्र में गेहूं की फसल अब तक जमी ही नहीं है। वहीं दूसरी तरफ सिंचित क्षेत्र में नहरों की दशा खराब होने और बारिश नहीं होने के कारण खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।
जिले में करीब चार दर्जन से अधिक सिंचाई नहरें टूट-फूट के कारण बंद पड़ी हैं। जो नहरें चालू भी हैं, उनमें बारिश नहीं होने के कारण पानी बहुत कम रह गया है। जिससे असिंचित और सिंचित दोनों ही क्षेत्रों में गेहूं की फसल पर संकट छा गया है।
इस बार जाड़े के सीजन में अभी तक बारिश नहीं हुई है जिससे जिले में असिंचित क्षेत्र में गेहूं की फसल का जमाव ही नहीं हुआ है। अब भविष्य में बारिश होती भी है तो गेहूं की फसल का बचना मुश्किल है। दूसरी तरफ सिंचित क्षेत्रों में अनेक नहरें बंद पड़ी हैं।
जानकारी के मुताबिक जिले के विभिन्न ब्लाकों में करीब चार दर्जन नहरें ठप हैं। ग्रामीणों की बार-बार मांग के बावजूद इन नहरों को चालू नहीं किया जा रहा है जिससे काश्तकारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नहरों में पानी नहीं आने से संबंधित क्षेत्रों में सिंचाई नहीं हो पा रही है जिससे वहां भी गेहूं की फसल बरबाद होने की कगार पर है।
सिंचाई नहरें आसपास की नदियों और गधेरों से बनाई गई हैं। इधर लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण नदियों और गधेरों का जल स्तर काफी कम हो गया है। जिससे नहरों में भी पर्याप्त पानी नहीं जा पा रहा है।
पानी के अभाव में भी कई नहरें बंद हो चुकी हैं या उनमें नाममात्र पानी रह गया है। आने वाले कुछ दिनों में बारिश नहीं हुई तो सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो जाएगी और सिंचाई वाले इलाकों में गेहूं, जौ सहित रबी की फसलों का उत्पादन काफी कम हो जाएगा।