यह कैसा हेलीपैड है न सुरक्षा दीवार, न विश्राम कक्ष की सुविधा। उस पर भी कार्य पिछले पांच माह से रुका पड़ा है। जबकि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले इसको लेकर बडे सब्जबाग दिखाए गए थे। हेलीपैड से क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद के चलते ही स्थानीय लोगों ने बड़े खेल मैदान को हेलीपैड के लिए देने में किसी तरह का विरोघ भी नहीं किया था। परंतु लोग अब ठगे नजर आ रहे हैं।
एडीवी एलीवेशन के माध्यम से वुडहिल कंपनी द्वारा बनाए जा रहे करीब 80 लाख रुपये की लागत के हेलीपैड का निर्माण कार्य पिछले चार पांच माह से ठप पड़ा है। सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि हेलीपैड के मानचित्र में पहले विश्राम कक्ष और सड़क आदि दर्शाया गया था, परंतु निर्माणकर्ता अब इसको लेकर चुप्पी साधे हुए हैं। यही नहीं हेलीपैड के लिए सुरक्षा दीवार बनाने का प्रावधान भी नही रखा गया है ऐसी स्थिति में खचार नाले के निकट बने हेलीपैड की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
इस सबके बीच हेलीपैड का निर्माण कार्य पिछले पांच माह से ठप पड़ा है। निर्माण स्थल पर दो हजार वर्ग मीटर में खंडवार आरसीसी करने के सिवाय खास कुछ नही हो पाया है। अभी तक वहां पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं बनाई गई है। लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह का हेलीपैड बनाना तो फिर खेल मैदान को बर्बाद क्यों किया गया। इस मामले को गत दिनों सामाजिक कार्यकर्ता प्रेमसिंह अटवाल ने बहुउद्देश्यीय शिविर में भी उठाया था। बताया जाता है कि सुरक्षा दीवार नहीं बनाई गई तो बरसात में खचार नाले का पानी हेलीपैड में घुसने की आशंका है।