अल्मोड़ा। एसएसजे विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग और लाइकेनोलॉजिकल सोसाइटी लखनऊ की ओर से सोमवार को ‘क्रिप्टोगैम्स एंड देयर रोल इन इनवायर्नमेंटल कंजरवेशन’ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। इसमें कुलपति प्रो. एनएस भंडारी ने लाइकेन वनस्पतियों की जानकारी दी। महामारी के दौर में बढ़ी क्रिप्टोगैमिक पौधों की उपयोगिता भी बताई।
कार्यक्रम में कुलपति ने कहा कि कोरोना काल में क्रिप्टोगैमिक पौधों की उपयोगिता बढ़ी है। यह पौधा पर्यावरण को संतुलित करता है। उन्होंने कहा कि चट्टानों, शिलाओं, पत्तियों की छालों, पुरानी दीवारों, भूतल आदि पर लाइकेन वनस्पतियां उग आतीं हैं। यह विभिन्न रंगों में उत्पन्न होती हैं।
गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय हरिद्वार में बॉटनी एंड माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. आरसी दुबे ने वैदिक माइक्रोबायोलॉजी से टेरिडोफाइट तक के क्रिप्टोगैमिक पौधों की जानकारी दी। वेबिनार में मशरूम की विभिन्न प्रजातियों की पहचान, उनके उत्पादन, दैनिक जीवन में इन पौधों के उपयोग और उनके योगदान पर भी व्याख्यान हुआ। डॉ. मंजूलता ने संचालन किया।
इस मौके पर एनबीआरआई लखनऊ के बायोलॉजी डिविजन के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एके अस्थाना, बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया सिक्किम हिमालयन सेंटर के वैज्ञानिक डॉ. बीएस खोलिया, इंडियन लाइकेनोलॉजिकल सोसाइटी के सचिव और वेबिनार के आयोजक डॉ. संजीव नायका, एनबीआरआई के माइक्रोबायोलॉजी डिविजन की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सूची श्रीवास्तव, वैज्ञानिक डॉ. सचित्र कुमार रथ, वेबिनार के संयोजक डॉ. बलवंत कुमार, आयोजक सचिव डॉ. धनी आर्या आदि रहे।