अल्मोड़ा/धौलछीना/रानीखेत। जिले के ऊंची चोटियों रूपीकूड़ा, विमलकोट में सीजन की पहली बर्फबारी हुई है। सर्दी की पहली बारिश और बर्फबारी के बाद तापमान लुढ़क गया है। लोग दिन भर ठिठुरते रहे। बारिश के चलते बाजारों में चहल पहल कम रही। शाम होते ही नगर की बाजारों में जल्दी सन्नाटा छा गया।
सोमवार की सुबह कुछ देर हल्की धूप खिली लेकिन उसके बाद आसमान बादलों से घिर आया। दोपहर में झमाझम बारिश हुई। धौलछीना के ऊंचाई वाले क्षेत्र विमलकोट, रूपीकूड़ा, जोलाबाज में दोपहर बाद सीजन की पहली बर्फबारी हुई। बर्फबारी और बारिश से तापमान लुढ़क गया। रविवार को अल्मोड़ा का अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस था। वहीं एक दिन में ही अधिकतम तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ गई। आपदा कंट्रोल रूम के मुताबिक सोमवार को अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान दो डिग्री सेल्सियस रहा। दिन भर धूप नहीं निकली और शीतलहर चली। लोग कड़ाके की ठंड के चलते ठिठुरते रहे।
कार्यालयों और घरों में लोगों ने हीटर, ब्लोअर आदि का सहारा लिया। विकासखंड भैंसियाछाना के रूपीकूड़ा गांव में भागवत कथा में शामिल होने आए विधायक मनोज तिवारी भी काफी देर तक बर्फबारी में फंसे रहे। इसके अलावा शौकियाथल, वृद्ध जागेश्धवर, पत्थरखानीआदि क्षेत्रों में भी बर्फवारी हुई। पर्यटन नगरी रानीखेत के ऊंचाई वाले चौबटिया क्षेत्र में दोपहर को मौसम ने करवट ली और हिमपात हुआ। ऊंची पहाड़ियां बर्फ से लकदक हो गईं। पूरे इलाके में शीतलहर चल रही है। क्षेत्र में पहुंचे पर्यटकों ने बर्फबारी का लुत्फ उठाया। बच्चे, युवा और अन्य लोग बर्फ में खेलते हुए और तस्वीरें लेते हुए देखे गए। बर्फबारी ने रानीखेत की खूबसूरती में चार चांद लगा दिए हैं।
सर्दी की पहली बारिश से रबी सीजन की फसलों को मिली संजीवनी
अल्मोड़ा। सर्दी की पहली बारिश से भले ही ठंड में इजाफा हुआ है लेकिन रबी सीजन की गेहूं, मसूर, सरसों आदि फसलों के लिए ये बारिश संजीवनी का काम करेगी। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक किसानों ने कुछ समय पहले रबी सीजन की फसलों की बुआई की थी। बारिश न होने से उस समय मिट्टी में नमी कम हो गई थी जिस कारण फसलों का जमाव ठीक तरीके से नहीं हो रहा था। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। प्रभारी मुख्य कृषि अधिकारी विनोद कुमार शर्मा ने बताया कि मौसम अनुकूल नहीं होने से रबी सीजन की फसलें प्रभावित होने लगी थीं। मिट्टी में नमी की कमी से अंकुरण में देरी हो रही थी। पौधों को उचित पोषण नहीं मिलने से उनकी वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ गई थी। इससे उत्पादन प्रभावित होने की आशंका थी। अब सर्दी की पहली बारिश से इन फसलों को काफी राहत मिलेगी। बारिश से मिट्टी में नमी आएगी। इससे रबी सीजन की फसलों का जमाव अच्छा होगा। इन फसलों की बढ़वार अच्छी होगी। इससे फसलों का बेहतर उत्पादन होगा। इधर किसान भी बारिश से राहत महसूस कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि ऐसी बारिश समय-समय पर होनी चाहिए।
अल्मोड़ा में 71 दिन बाद बरसे मेघ
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा में 28 सितंबर को 3.2 एमएम बारिश हुई थी। इसके बाद बारिश नहीं हुई। इससे लोग परेशान थे। 71 दिन बाद सोमवार को बारिश हुई तो लोगों के चेहरों पर मुस्कान लौट गई। इधर रानीखेत में आठ अक्तूबर को एक एमएम बारिश हुई थी। इसके बाद मौसम सामान्य रहा। 72 दिन बाद हुई बारिश से रानीखेत के लोगों को राहत मिली।