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युवा वोटर बोले तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के बगैर कैसे हो विकास

Sun, 05 Feb 2017 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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वोट ह‌ै ताकत - फोटो : अमर उजाला
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। अमर उजाला की ओर से पर्यटन नगरी में आयोजित चुनाव परिचर्चा में क्षेत्र की उपेक्षा को लेकर लोगों ने बेबाकी से अपनी अपनी राय रखी। जिला, खेल मैदान, पलायन, बदहाल स्वास्थ्य, शिक्षा व्यवस्था, तकनीकी शिक्षण संस्थानों के अभाव के मुद्दे छाए रहे। पहली बार वोटर बन रहे युवाओं का कहना था कि युवाओं का भविष्य संवारने के लिए कोई भी सरकार संवेदनशील नहीं रही है।
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लोगों का कहना था कि अंग्रेजों ने रानीखेत को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का सपना देखा था, लेकिन सरकारें इस ऐतिहासिक क्षेत्र को जिला तक नहीं बना सकीं। चुनाव में जनमुद्दे हाशिए पर हैं, धनबल, बाहुबल, क्षेत्रवाद को तवज्जो दी जा रही है। तय हुआ कि वोट मांगने आ रहे जनप्रतिनिधियों से मुद्दों को लेकर बात की जाएगी।

आजादी के बाद अपने हुक्मरानों ने रानीखेत की ऐसी उपेक्षा की कि यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ सका है। सबसे बड़ा मुद्दा रानीखेत जिले का है। 1955 से यह मांग चली आ रही है, तमाम बड़े आंदोलनों के बावजूद आश्वासनों के झुनझुने थमाए गए। नगर क्षेत्र कैंट बोर्ड के अधीन होने के कारण यहां लोगों को भवन निर्माण में भारी दिक्कतें हैं, लेकिन नगरपालिका नहीं बन सकी। 
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यहां त्रिभुवन कांप्लैक्स में शनिवार को हुई परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार आनंद नेगी ने कहा कि पहाड़ से पलायन बड़ा मुद्दा है, लेकिन चुनाव में यह मुद्दा कोई भी दल नहीं उठा रहा है। पारंपरिक खेती किसानी को बढ़ावा देकर पलायन रुक सकता है। सामाजिक कार्यकर्ता सतीश पांडे ने कहा कि जमीनी हकीकत को समझने वाले को ही चुना जाना चाहिए। पूर्व सैनिक हरी सिंह नेगी ने कहा कि पानी की भारी कमी है।

बेरोजगार बढ़ रहे हैं। सरकारें इन मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं दिख रही। युवा वोटर ज्योति पंत ने कहा कि क्षेत्र में अच्छी शिक्षण संस्थाओं का अभाव है। डॉक्टरी, इंजीनियरिंग की कोचिंग लेने के लिए युवाओं को बाहर जाना पड़ रहा है। युवा वोटर निखिलेश बिष्ट, अर्पित नेगी ने कहा कि राजनीति का परिदृश्य पूरी तरह से बदल गया है। पार्टियों ने दल बदल के माध्यम से वोटरों को भी भ्रमित कर दिया है। दिशा बिष्ट ने कहा कि तकनीकी शिक्षण संस्थाएं खुलने से क्षेत्र से ही युवाओं का पलायन रुकेगा। वयोवृद्ध कोच मो. इदरीश बाबा ने कहा कि पीढ़ियां गुजर गई, लेकिन एक खेल स्टेडियम नसीब नहीं हुआ है।
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