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‘प्रेमचंद के साहित्य में ग्राम्य जीवन का विशद विवरण’

Tue, 01 Aug 2017 11:51 PM IST
अल्मोड़ा़, अमर उजाला ब्यूरो
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कथाकार प्रेमचंद जयंती पर नगर पालिका अल्मोड़ा में हुई गोष्ठी में पुस्तकों का विमोचन करती मुख्य वक्ता डा. दिवा तथा अन्य। - फोटो : अमर उजाला
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 137वीं जयंती पर कुमाऊंनी भाषा साहित्य एवं संस्कृति प्रचार समिति और पहरू पत्रिका की ओर से पालिका सभागार में हुई गोष्ठी में कथाकार प्रेमचंद के साहित्य में शोध कर रहे पवनेश ठकुराठी ने प्रेमचंद के कथा साहित्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद ने अपने कथा साहित्य में ग्राम्य जीवन का विशद विवरण किया है। 
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मुख्य वक्ता प्रो. दिवा भट्ट ने कहा कि प्रेमचंद ने साहित्य को जमीनी स्तर पर उतारा। उन्होंने कहा कि कुमाऊंनी कथा साहित्य में भी धीरे-धीरे बेहतरीन रचनाएं सामने आ रही हैं। उपन्यास की अपेक्षा कहानी साहित्य पर अधिक कार्य हो रहा है। पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी, नीरज पंत, नवीन पाठक, डा. शेर सिंह बुडाल, डा. हयात रावत ने भी विचार रखे। डा. दलीप सिंह बोरा के हिंदी कविता संग्रह बहस और पवनेश ठकुराठी की कुमाऊंनी में लिखी मेरि संगोष्ठियों डायरी का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में डा. शमशेर सिंह बिष्ट, आनंद बिष्ट, मीनू जोशी, नीरज भट्ट, मनीनमन, ललित योगी, केबी पांडे, गिरीश मल्होत्रा, तफज्जुल खान, अनूप तिवारी, रमेश रावत, धाराबल्लभ पांडेय, प्रो. देव सिंह पोखरिया, लीला खोलिया मौजूद थे। 

इधर मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर जीआईसी नाई में हुए कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने प्रेमचंद के कहानी पर आधारित नाटक राष्ट्र का सेवक का मंचन किया। कालेज के प्रधानाचार्य इंद्रेश कुमार पांडे, संयोजक पवनेश ठकुराठी, रमेश रावत, अंकुर जोशी ने विचार रखे। कार्यक्रम में नवल किशोर, बलवीर भाकुनी, अजरा परवीन, सोनम देवी, सौरभ कुमार, कौशल अग्रवाल, तनुजा, ज्योति, निशा, हिमानी, सोनी बिष्ट, अंकिता, मोहित, राहुल आदि मौजूद थे। 
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