विमांडेश्वर मंदिर का विहंगम दृश्य। संवाद न्यूज एजेंसी
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। सिमलगांव रोड पर नगर से सात किमी की दूरी पर स्थित उत्तराखंड की काशी नाम से विख्यात विमांडेश्वर शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का केंद्र है। नंदिनी और सुरभि नदियों के संगम स्थल पर यह ब्रह्मतीर्थ है। इस संगम स्थल पर स्नान करने से पितरों का तर्पण भी किया जाता है। मान्यता है कि जो यहां पूजा करता है, वह शिवलोक में पूजित होता है। जनश्रुति है कि, वर्तमान शिव मंदिर वाले क्षेत्र में शिवशक्ति का पता तब चला जब एक गाय रोजाना घास चरने के बाद झाड़ियों के बीच स्थित शिवलिंग के ऊपर दूध बहाकर शिव जी को स्नान कराती थी। गाय के दूध की कमी पर उसके मालिक ने जब गाय का पीछा किया तो देखा उस गाय ने शिवजी को दूध से स्नान करवाया और बाद में वह गाय संगम स्थल पर पत्थर बन गई। इसे कपिला गाय और कपिला कुंड के नाम से जाना जाता है। दर्शनार्थी कपिला कुंड में स्नान करने के बाद कपिला पूजन कर पुण्यलाभ पाते हैं। अथातो घुमक्कड़ जिज्ञासा लिखने वाले साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन ने मंदिर का निर्माण काल 10वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य बताया था।