द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। द्वाराहाट विकासखंड की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत ईड़ा में पेयजल, सड़क, स्वास्थ्य, परिवहन आदि समस्याओं को लेकर चल रहा आमरण अनशन 31वें दिन समाप्त हो गया। बृहस्पतिवार को विधायक महेश नेगी विभागीय अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे, उन्होंने गांव के लिए सड़क बनाने का शासनादेश दिखाया। पानी की समस्या का उचित समाधान करने का आश्वासन दिया, तब जाकर ग्रामीणों ने अनशन समाप्त किया।
ग्रामीणों की ओर से छह अक्तूबर से भगवती मंदिर परिसर में आमरण अनशन किया जा रहा था। बृहस्पतिवार को द्वाराहाट के विधायक महेश नेगी विभागीय अधिकारियों के साथ अनशन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों के साथ सभी मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। विधायक ने गांव के लिए सड़क निर्माण का शासनादेश दिखाया गया। कहा कि पानी की समस्या के निराकरण के लिए भी वह अपने स्तर से प्रयास कर रहे हैं। शीघ्र ही इस समस्या का भी निराकरण हो जाएगा।
इसके बाद आंदोलनकारियों ने आमरण अनशन समाप्त कर दिया। विधायक नेगी की ओर से दोनों आमरण अनशनकारी केसर सिंह और जीवन सिंह को जूस पिलाया। आंदोलनकारियों ने पेयजल आपूर्ति सुचारु रूप से नहीं होने की दशा में भविष्य में फिर से आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी है। इस अवसर पर एसडीएम आरके पांडे, लोक निर्माण विभाग के ईई एमसी जोशी, एई पीडब्ल्यूडी हिमांशु भट्ट, जल निगम के ईई आरआर वर्मा, जल निगम के एएई महेश्वरा नंद, जल संस्थान के ईई सुरेश ठाकुर, भाजपा जालली मंडल अध्यक्ष जनार्दन पांडे, ईड़ा प्रधान मनोज रावत, हेमंत बिष्ट, देव सिंह, गोविंद अधिकारी, विपिन चंद्र आर्या सहित ग्रामीण उपस्थित थे ।
अनशन के बाद जगी विकास की उम्मीद
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। आंदोलन में बड़ी ताकत होती है और यह बात ईड़ावासियों ने साबित करके भी दिखाई है। पानी और सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं से आजिज आए ग्रामीणों ने एकजुटता दिखाई और आमरण अनशन शुरू किया। 1, 2, 3...7...10...15...20..25...29 करके अनशन को पूरा एक महीना पूरा हो गया पर ग्रामीणों का हौसला नहीं टूटा। हार नहीं मानते 31वें दिन भी ग्रामीणों का अनशन जारी था। अंत में ग्रामीणों की जीत हुई और विधायक के आश्वासन के बाद अनशन समाप्त किया। पर इस अनशन से ग्रामीणों के भीतर गांव के विकास की उम्मीद जगी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि अनशन करने से कुछ तो हुआ। पेयजल के लिए बोरिंग का कार्य शुरू हो गया है। सड़क के लिए विधायक महेश नेगी ने शासनादेश दिखाया है। यदि तय सीमा तक समस्या का निराकरण नहीं होता तो फिर से आंदोलन की राह पकड़नी पड़ेगी। हालांकि अधिकांश ग्रामीणों में उम्मीद है कि अब समस्याओं का निराकरण हो जाएगा।
-जमीनीवार से ईड़ा चौंधार तक गांव को जोड़ने वाली मुख्यमंत्री की घोषणा के तीन वर्षों बाद अब इस रोड के धरातल पर आने की उम्मीद दिखाई दे रही है। विभागीय अधिकारियों ने शासनादेश से इसकी प्रगति की जानकारी दी है। -विपिन आर्या, ईड़ा।
- लोनिवि अधिकारियों ने एक माह के भीतर सड़क निर्माण की निविदाएं होने की बात कही है। यदि समय पर कार्य शुरू नहीं हुआ तो फिर से ग्रामीण वृहद आंदोलन शुरू कर देंगे। अब ग्रामीण झूठे आश्वासनों पर विश्वास नहीं करेंगे। -हेमंत बिष्ट, ईड़ा
- पहाड़ के विकास की अवधारणा को लेकर राज्य का निर्माण हुआ था, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं के लिए एक महीने तक आमरण अनशन करना पड। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। फिर से बरगलाया गया तो आंदोलन ही एकमात्र चारा है। -कमला देवी, ईड़ा
-विधायक महेश नेगी ने सड़क का शासनादेश दिखाया है। अब देखना है कि काम कब तक शुरू होता है। फिलहाल हमने एक महीने का समय निर्धारित किया है। प्रगति नहीं होती तो फिर से अनशन की राह अपनानी पड़ेगी। -केसर सिंह, अनशनकारी ईड़ा।
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- सड़क निर्माण के लिये 1.55 करोड़े रुपये की धनराशि का शासनादेश ग्रामीणों को सौंपा है। जल जीवन मिशन के तहत जल्द ही स्वीकृत पेयजल योजना और सड़क निर्माण का कार्य शुरू होगा। -महेश नेगी, विधायक