सड़क के लिए प्रदर्शन करते ग्रामीण।
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अलग राज्य बनने के बाद भी तहसील क्षेत्र के अंतर्गत गांवों में जनसमस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। स्वीकृति के एक दशक बाद भी बजेल-पायां- ओकाली सड़क नहीं बनने पर ग्रामीणों ने बजेल गांव में प्रदर्शन कर चुनाव बहिष्कार का ऐलान किया है।
2005 में बजेल-पायां-ओकाली मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली। सड़क निर्माण का उद्देश्य बजेल, ओखली, पायां, कोटुली गांव को यातायात सुविधा मुहैया कराना था। इन गांवों के लोगों को दो से तीन किमी पैदल चलना पड़ता है। सड़क न होने से ग्रामीणों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इससे स्थानीय ग्रामीणों में शासन-प्रशासन, अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों के खिलाफ आक्रोश व्याप्त है।
गुस्साए ग्रामीणों ने सोमवार को बजेल गांव में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सड़क की मांग को लेकर कई बार डीएम और उच्चाधिकारियों को ज्ञापन भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास की ओर किसी का भी ध्यान नहीं है। लगातार क्षेत्र की उपेक्षा की जा रही है। सड़क न होने से वृद्धों और बीमार लोगों को सड़क तक पहुंचाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने रोड नहीं तो वोट नहीं का ऐलान करते हुए 15 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव के बहिष्कार का ऐलान किया है। इस संबंध में उन्होंने डीएम और निर्वाचन आयोग को ज्ञापन भेजा है। प्रदर्शन में कमला बिष्ट, श्याम सिंह, पंकज बजेली, जगत कैड़ा, भइया पांडे, हेम पांडे, दीप तिवारी, वीरेंद्र सैजारी, बलवंत सैजारी, दीपक जनौटी आदि शामिल हुए।