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रिस्कन नदी में कोरोना शवदाह केंद्र बनाने से भड़के ग्रामीण 16-15-55

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शवदाह गृह बनाने का विरोध करते रिस्कन घाटी के ग्रामीण। - फोटो : RANIKHET
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। रिस्कन नदी में कोरोना शवदाह गृह बनाए जाने की भनक लगते ही जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण भड़क गए हैं। उनका कहना है कि नदी से आसपास के ग्रामीण पीने का पानी इस्तेमाल करते हैं। शवदाह केंद्र बनने से महामारी फैलने की आशंका है। एसडीएम कार्यालय में नारेबाजी के साथ विरोध प्रदर्शन किया और डीएम को ज्ञापन भेजकर आंदोलन करने की चेतावनी दी।
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ग्रामीणों ने पहले विमांडेश्वर मंदिर परिसर में बैठक की। बाद में ग्रामीणों ने चयनित स्थल पर ही प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध जताया। तहसील में उपजिलाधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजा। जिसमें चेतावनी दी है कि रिस्कन नदी पर कोरोना शवदाह केंद्र बनाया गया तो क्षेत्रवासी आंदोलन को बाध्य होंगे।
कहा कि रिस्कन नदी पर कोरोना शवदाह गृह बनाया जा रहा है, जिसका वे विरोध करते हैं। क्योंकि इस नदी के नीचे की ओर और आसपास के गांव के ग्रामीण पीने का पानी तथा अन्य कार्यों के लिए पानी की पूर्ति करते हैं। इस स्थान पर कोरोना शवदाह गृह बनने से क्षेत्र में महामारी फैलने की आशंका है।
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यदि शवदाह केंद्र बनाया गया तो रिस्कन घाटी संघर्ष समिति क्षेत्रवासियों के साथ आंदोलन को बाध्य होगी। ज्ञापन देने वालों में रिस्कन घाटी संघर्ष समिति अध्यक्ष हरवंश सिंह, खलना क्षेत्र पंचायत सदस्य जगदीश बुधानी, रणां प्रधान देवकी देवी, नैंणी के पंकज तियवारी, बनोली के प्रशांत सिंह, बेढूली की सीनू आर्या, पूर्व प्रधान संगठन अध्यक्ष महेश पंत, रमेश चन्द्र पुजारी, जीसी कांडपाल, नवीन कांडपाल, मनोज कुमार, कमल सिंह, दीवान सिंह, कुंदन सिंह आदि थे।
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