अल्मोड़ा। भारतीय क्रिकेट टीम की शान महेंद्र सिंह धोनी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अचानक अलविदा कहने की खबर से क्रिकेट प्रेमियों के साथ उनके पैतृक गांव के लोग भी हैरत में हैं। अपने हेलीकॉप्टर शॉट के जरिये गेंद को ऊंचाई पर पहुंचाने वाले महेंद्र सिंह धोनी मूलरूप से जैंती तहसील के ल्वाली गांव निवासी हैं। 70 के दशक में धोनी के पिता पान सिंह धोनी नौकरी के सिलसिले से रांची जाकर बस गए थे। यहां उनके चाचा रहते थे, जिन्होंने कुछ साल पहले हल्द्वानी में मकान बना लिया है। गांव में परिवार के अन्य लोग रहते हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर धोनी के अचानक सन्यास लेने की खबर पल भर में गांव में फैल गई। हर कोई उनके फैसले से हैरान नजर आया। हर किसी का कहना है कि बीसीसीआई को उन्हें मनाना चाहिए और विधिवत तरीके से अंतरराष्ट्रीय मैच में खेलने के दौरान सन्यास की घोषणा करनी चाहिए जैसे सचिन तेंदुलकर ने की थी।
अचानक से उनके इस तरह क्रिकेट से सन्यास लेने से हम सभी लोग हैरान हुए हैं। उन्हें कम से कम आखिरी बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते देखना चाहते थे।
दिनेश सिंह धौनी, प्रधान ल्वाली।
करीब दो महीने पहले महेंद्र सिंह धोनी के पिता से फोन पर वार्ता हुई थी। माही ने घर में भी कभी संन्यास लेने का कोई जिक्र नहीं किया था।
हयात सिंह धोनी, बीडीसी ल्वाली।
महेंद्र सिंह धौनी से पिछले साल मुलाकात हुई थी। क्रिकेट में उन्होंने हमेशा ही अपना पूरा योगदान दिया है। प्रस्तावित टी-20 में भी यदि वह खेलते तो ज्यादा अच्छा होता।
-एकता बिष्ट, महिला क्रिकेटर।
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धौनी ने देश का किया नाम, पर गांव में मैदान तक नहीं
जैंती-ल्वाली चार किलोमीटर मोटरमार्ग का भी नहीं हुआ निर्माण
यासिर खान(संवाद)
अल्मोड़ा। अपनी कप्तानी से देश-विदेश में लोहा मनवाने वाले महेंद्र सिंह धोनी का पैतृक गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यहां अब तक खेल मैदान तक नहीं है। हालांकि समीपवर्ती गांव में पहले खेल मैदान बनाया गया। लेकिन मूल गांव के ग्रामीण आज भी धोनी के नाम का खेल मैदान बनने की राह देख रहे हैं। इसके अलावा गांव के लिए जैंती से ल्वाली मोटरमार्ग का भी निर्माण नहीं हो सका है।
16 साल पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कॅरियर शुरू करने वाले धोनी के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज हैं। उनके नेतृत्व में ही भारतीय टीम ने दोबारा वर्ल्ड कप जीता। खेल जगत में लंबा समय गुजार चुके पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अब सन्यास का ऐलान कर चुके हैं। लेकिन उनके पैतृक गांव सालम के ल्वाली की सुध लेने वाला कोई नहीं हैं। गांव में खेल मैदान तक की सुविधा नहीं हो पाई। धोनी के रिश्ते के भाई क्षेत्र पंचायत सदस्य हयात सिंह धोनी ने बताया कि लंबे समय से ग्रामीण गांव में धोनी के नाम का खेल मैदान बनवाना चाहते हैं। हालांकि गांव से ही करीब दो किमी दूर थुवासिमल बचकांडे में छह साल पूर्व धोनी के नाम से खेल मैदान बनाया गया, लेकिन यह गांव से काफी दूर बना। ग्रामीण धोनी के नाम से गांव में ही खेल का मैदान बनाने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री निशंक ने जैंती-ल्वाली मोटरमार्ग निर्माण की घोषणा की थी। लेकिन मोटरमार्ग का कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। गांव के लोगों को 16 किमी लंबे मार्ग से होकर विभिन्न कार्यों के लिए जैंती जाना पड़ता है।
एकता बिष्ट ने न्यूजीलैंड में की थी मुलाकात
रोहित भट्ट
अल्मोड़ा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से महेंद्र सिंह धोनी के अचानक संन्यास लेने से खेल जगत से जुड़े लोगों और खेल प्रेमियों में भी काफी हैरानी है। महिला क्रिकेटर एकता बिष्ट ने धोनी के अचानक लिए फैसले पर दुख जताया है। वह अब भी उन्हें आगामी टी-20 सीरीज में खेलता देखना चाहती हैं।
महिला क्रिकेटर एकता बिष्ट ने बताया कि वह पिछले वर्ष न्यूजीलैंड में हुई क्रिकेट श्रृंखला में गई न्यूजीलैंड गई हुई थीं। वहां उन्होंने महेंद्र सिंह धोनी से मुलाकात की। धोनी और एकता के बीच काफी लंबे समय तक बातचीत हुई। धोनी ने एकता को क्रिकेट के कई गुर सिखाए। उन्होंने खेले मैदान में दबाव को दूर करने के लिए उन्हें कुछ सुझाव भी दिए। एकता ने कहा कि उनके संन्यास के फैसले से वह काफी हैरान हैं। उन्होंने कहा कि आगामी टी-20 वर्ल्ड कप में वह अच्छा प्रदर्शन कर भारत की जीत में अपना योगदान देते तो ज्यादा अच्छा रहता।
सुरेश रैना को भी भाया था अल्मोड़ा
अल्मोड़ा। महेंद्र सिंह धोनी के साथ ही सुरेश रैना ने भी स्वतंत्रता दिवस पर क्रिकेट से अलविदा कह दिया है। सुरेश रैना को भी अल्मोड़ा की आबोहवा बहुत पसंद थी। 2017 में वह यहां आए हुए थे। उन्होंने अल्मोड़ा के स्टेडियम की तुलना धर्मशाला से की थी। बिनसर में बुरांश के फूलों ने रैना को जमकर लुभाया था। रैना ने तब पहाड़ों के मौसम और अल्मोड़ा की जमकर तारीफ की थी। बार-बार यहां आकर ट्रैकिंग करने की भी इच्छा जताई थी। इस दौरान कई लोगों ने उनके साथ सेल्फी भी खिचवाईं थी।
एकता बिष्ट के कोच का कोट
महेंद्र सिंह धोनी के अचानक से संन्यास लेने के फैसले से मैं बिल्कुल भी खुश नहीं हूं, एक खिलाड़ी की पहचान उसके खेल से है। खिलाड़ी की विदाई खेल मैदान से होनी चाहिए थी। मैं बहुत हैरान हूं कि उन्होंने एकदम से ही रिटायर होने का फैसला ले लिया। कम से कम एक मैच खेलते हुए मैदान से ही विदाई होनी चाहिए थी।
लियाकत अली, एकता बिष्ट के कोच।
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