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व्याकरण की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध कुमाऊंनी बोली : प्रो. पोखरिया

Sat, 10 Nov 2018 11:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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अल्मोड़ा में हुए कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन को संबोधित करते प्रो. देव सिंह पोखरिया। - फोटो : अमर उजाला
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 कुमाऊंनी भाषा साहित्य संस्कृति प्रचार समिति की ओर से नगर के थाना बाजार स्थित कुंदन लाल शाह प्रेक्षागृह में तीन दिनी दसवां राष्ट्रीय कुमाऊंनी भाषा सम्मेलन शुरू हो गया है। मुख्य व्याख्यान में प्रो. देव सिंह पोखरिया ने कहा कि कुमाऊंनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में स्थान दिया जाना चाहिए। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं में कुमाऊंनी और गढ़वाली लोकभाषा, साहित्य से संबंधित सवाल पूछे जाएंगे जो यहां के युवाओं के लिए उपयोगी होंगे।  
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उन्होंने कहा कि कुमाऊंनी व्याकरण की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध भाषा है। प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ आक्रोश जताते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भाषा संस्थान जैसी अकादमियों से जनता को कोई लाभ नहीं मिल रहा है। प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए दिल्ली से पहुंचे वरिष्ठ साहित्यकार पूरन चंद्र कांडपाल ने कहा कि दिल्ली में उत्तराखंडी बोलियों की अकादमी स्थापित की जा रही है। उन्होंने प्रदेश सरकार की उत्तराखंडी बोली के प्रति बरती जा रही उदासीनता पर नाराजगी जताई। द्वितीय सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. जगत सिंह बिष्ट ने कहा कि कुमाऊंनी बोली में उन्ही शब्दों का प्रयोग किया जाना चाहिए जो कंप्यूटर और तकनीकी की दृष्टि से सुविधाजनक हो। मानकीकरण से कुमाऊंनी बोली के लेखन में एकरूपता आएगी। द्वितीय सत्र में हुई कार्यशाला में रचनाकारों को सौ शब्द दिए गए। इस्कूल, चेलि, हमर आदि शब्दों पर एकरुपता से सहमति बनी।  

तीसरे सत्र में कुमाऊंनी लोक साहित्य पर चर्चा हुई। महेंद्र ठकुराठी ने कहा कि लोक साहित्य समाज का आइना होता है। उसमें लोक की संवेदनाएं निहित रहती है। संचालन ईश्वरी दत्त जोशी और डॉ. हयात सिंह रावत ने किया। इस मौके पर डॉ. जीवन सिंह मेहता, डॉ.केसी जोशी, डॉ. हयात रावत, डॉ. दिनेश भट्ट, देव सिंह पिलख्वाल, डॉ. ओमप्रकाश आर्य, रतन किरमोलिया, रमेश हितैषी, गिरीश बिष्ट हंसमुख ने विचार रखे। लता पांडे, विमला बोरा, चंदन बोरा, दीवान कनवाल, नारायण थापा, कैलाश डोलिया लोककलाकारों ने छपेली, न्योली, लोकगीत प्रस्तुत किए।  
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कुमाऊंनी लेखन के लिए विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए 
अल्मोड़ा। सम्मेलन में पहले दिन खुशाल सिंह खनी को इंद्र सिंह स्मृति कुमाऊंनी बाल कहानी लेखन पुरस्कार, डॉ. पवनेश ठकुराठी को कालू सिंह स्मृति कुमाऊंनी संस्मरण और भारतेंदु निर्मल जोशी कुमाऊंनी समालोचना लेखन पुरस्कार, विनोद पंत को जमुना देवी खनी स्मृति कुमाऊंनी हास्य नाटक पुरस्कार, आनंद सिंह बिष्ट को कुमाऊंनी शब्द चित्र लेखन पुरस्कार, लोक गायक और कवि हीरा सिंह राणा को शेर सिंह बिष्ट अनपढ़ कुमाऊंनी कविता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  

दो पुस्तकों का लोकार्पण किया 
अल्मोड़ा। सम्मेलन में पूरन चंद्र कांडपाल के नाटक सांचि और रमेश हितैषी के कुमाऊंनी कविता संग्रह लौटि आ का लोकार्पण किया गया। वहां नीरज भट्ट, जमन सिंह बिष्ट, अमर कार्की, नवीन जोशी, रूप सिंह बिष्ट, केबी पांडे, डॉ. दीप चौधरी, कृपाल शीला, नारायण मेहरा, दामोदर जोशी आदि मौजूद थे।  
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