तकनीकी शिक्षण संस्थाओं को सुदृढ़ बनाने के दावों में कितना दम है इस बात की तस्दीक बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी (बीटीकेआईटी) कर रहा है, यहां प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर सहित रिक्त पड़े विभिन्न पदों पर एक साल बाद भी साक्षात्कार नहीं हो पाए हैं। जिसके चलते संस्थान में अध्ययनरत 1732 भावी इंजीनियरों की पढ़ाई वैकल्पिक व्यवस्था के सहारे चल रही है।
मालूम हो कि संस्थान के निदेशक ने 30 जनवरी 2016 में बायो केमिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, केमिकल इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रोनिक, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग और एमबीए सहित तमाम विषयों में स्थायी प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसरों के रिक्त पड़े 46 पदों के लिए आवेदन मांगे थे, इसके लिए भारी संख्या में अभ्यर्थियों के आवेदन भी आए, लेकिन एक साल का समय बीत गया है, अभ्यर्थियों का आज तक साक्षात्कार नहीं हुआ। वर्तमान में शिक्षण कार्य वैकल्पिक व्यवस्था पर चल रहा है।
1991 में इलेक्ट्रोनिक्स और कंप्यूटर साइंस से संचालित इस संस्थान में वर्तमान में सिविल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक, मैकेनिकल, कंप्यूटर इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग, बायोकेमिकल इंजीनियरिंग, एमसीए, दो वर्षीय कंप्यूटर इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रोनिक इंजीनियरिंग और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एमटेक सहित 11 ट्रेड संचालित हो रहे हैं, जबकि 18 अभ्यर्थी यहां पीएचडी भी कर रहे हैं। अलबत्ता एक वर्ष बाद भी विज्ञापित पदों पर साक्षात्कार नहीं होने से तकनीकी शिक्षण संस्थान के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।