फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

17वीं शताब्दी में बाजबहादुर का रहा स्वर्णिम शासनकाल

Mon, 01 Feb 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन
चंद शासनकाल के प्रतिष्ठित राजा रहे बाज बहादुर चंद के कार्यों की जानकारी अब जनसामान्य को मिल सकेगी। बाज बहादुर के कार्यकाल को चंद वंश का स्वर्णिम दौर माना जाता है। उन्होंने चार दशक तक शासन किया। उनके द्वारा किए गए कार्यों से संबंधित ताम्रपत्रों को संकलित कर उत्तराखंड शोध संस्थान अल्मोड़ा पुस्तक प्रकाशित करेगा।
विज्ञापन


विभिन्न स्थानों पर चंद शासकों का शासन वर्ष 989 से 1790 तक रहा। इस दौरान कई चंद शासकों ने राज किया। सबसे अधिक चंद शासक ज्ञान चंद का शासनकाल 1367 से 1420 ईस्वी तक चंपावत में रहा। उन्होंने 63 साल तक शासन किया, जबकि 1638 से 1678 ई तक 40 साल अल्मोड़ा से बाजबहादुर चंद ने कुमाऊं में शासन किया।

बाजबहादुर के कार्यकाल को चंद शासनकाल का स्वर्णिम समय माना जाता है। इसकी जानकारी प्रकाश में आए ताम्र पत्रों से मिली है। राजा बाज बहादुर चंद सामाजिक कार्यों से जुड़े शासक रहे। राजा बाज बहादुर चंद्र काफी दानी थे।
विज्ञापन


 अपने कार्यकाल में उन्होंने अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम, स्यूनराकोट, सोमेश्वर में शिव मंदिर, पिनाकेश्वर महादेव मंदिर, पिथौरागढ़ में राईआगर के समीप पंतोला में पंत परिवार, उर्ग में जोशी परिवार, बयाला मंदिर, बत्युली गांव, नैनीताल जिले के पत्यालोकट, चंपावत में बालेश्वर मंदिर, पूर्णागिरी मंदिर समेत आसपास के काफी गांवों के लिए जमीन गूंठ (दान) में दी थी।
\
जागेश्वर मंदिर को 365 गांव गूंठ में दिए थे। काफी समय पहले तक इन गांवों के लोग नियमित रूप से जागेश्वर धाम में भोग के लिए खाद्य सामग्री लाते थे। क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई अल्मोड़ा के सहायक अन्वेषण अधिकारी डॉ. चंद्र सिंह चौहान कहते हैं कि बाज बहादुर का शासनकाल स्वर्णिम रहा है।

कुमाऊं मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में चंद शासक बाज बहादुर चंद के शासनकाल में करीब 25 ताम्र पत्र प्रकाश में आए हैं। इधर एसएसजे परिसर के प्राध्यापकों और अन्य लोगों ने उत्तराखंड शोध संस्थान अल्मोड़ा इकाई गठित की है। संगठन अब राजा बाज बहादुर चंद के शासनकाल के ताम्रपत्रों को संकलित कर पुस्तक प्रकाशित करेगा।

उत्तराखंड शोध संस्थान अल्मोड़ा इकाई के लिए प्रो. विद्याधर सिंह नेगी संयोजक, प्रो. दया पंत अध्यक्ष, प्रो. जगत सिंह बिष्ट उपाध्यक्ष, दीपा चौहान सचिव चुने गए हैं।

शिवचरण पांडे, प्रो. धर्मपाल अग्रवाल, जगदीश चंद्र भट्ट, शिरीष पांडे सचिव बनाए गए हैं। संगठन ने निर्णय लिया है कि राजा बाज बहादुर चंद के ताम्र पत्रों को संकलित कर प्रकाशन किया जाएगा। लघुडियार से बौणसी तक विद्यमान प्राचीन चित्रित शैलचित्रों के संरक्षण और पाटिया में बग्वाल के विकास को हरसंभव प्रयास होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें