उत्तराखंड लोक वाहिनी की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में देश की आजादी के बाद से अब तक प्रमुख आंदोलन होते रहे, लेकिन आपराधिक तत्वों की आंदोलनकारियों से मारपीट करने की हिम्मत नहीं हुई। आंदोलनकारी पीसी तिवारी और रेखा धस्माना के साथ हुई मारपीट अराजकता का प्रतीक है।
अध्यक्षता करते हुए वाहिनी के अध्यक्ष डा. शमशेर सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखंड को अराजकता की ओर ले जाने की यह प्रवृति राज्य हित में नहीं है। इसका सभी राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र का विकास जमीनों की खरीद फरोख्त से नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की योजनाओं के विकास से होगा। राज्य में कई राष्ट्रीय और ख्याति प्राप्त शिक्षण संस्थाएं हैं पर इसका लाभ कोई भी गरीब उठाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में नानीसार में जिंदल के स्कूल से न तो ग्रामीण और न ही राज्य का भला होने वाला है।
वाहिनी महासचिव पूरन चंद्र तिवारी ने कहा कि राज्य में कई औद्योगिक इकाईया बंद पड़ी हैं पर सरकार बाउंसरों के माध्यम से अराजकता फैला रही है। उन्होंने मारपीट करने वाले तत्वों की गिरफ्तारी नहीं होने पर रोष जताया। संचालन दयाकृष्ण कांडपाल ने किया। बैठक में छावनी परिषद उपाध्यक्ष जंगबहादुर थापा, दयाकृष्ण कांडपाल, हरीश मेहता, मो. अनिरुद्दीन, शमशेर जंग, सुशीला धपोला आदि मौजूद थे।