इस दौरान हर आंख नम दिखाई दी। अंतिम दर्शन के बाद बलिदानी बीरेश्वर गोस्वामी की अंतिम यात्रा निकाली गई। उनकी पार्थिव देह को विश्वनाथ घाट ले जाया गया जहां पूरे सैन्य सम्मान और रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। बलिदानी के चाचा और उनके बड़े भाई ने उन्हें मुखाग्नि दी। विश्वनाथ घाट पर आयोजित अंतिम संस्कार कार्यक्रम में भारतीय सेना ने शस्त्र झुकाकर एवं गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान कर बलिदानी अधिकारी को अंतिम सलामी दी गई। सैन्य परंपराओं के अनुरूप पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
इस दौरान जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने बलिदानीलेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्र की रक्षा के लिए दिया गया उनका सर्वोच्च बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा तथा युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा उन्होंने शोक संतृप्त परिवार के प्रति गहरी शोक संवेदनाएं व्यक्त की।
दो दिन बाद बनने वाले थे कैप्टन
लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का सैन्य कॅरिअर बेहद उज्ज्वल था। जनवरी 2023 में सेना में शामिल होने के बाद जून 2024 में उन्हें कमीशन मिला था। ठीक दो दिन बाद ही वह कैप्टन बनने वाले थे। परिवार और सहकर्मी इस ऐतिहासिक पल का इंतजार कर रहे थे लेकिन इससे पहले ही वह देश सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दे गए।