पुरातत्व विभाग स्वामी विवेकानंद की स्मृतियों को सहेजने का कार्य कर रहा है। निदेशक संस्कृति विभाग के निर्देश पर इन दिनों कुमाऊं मंडल के उन विभिन्न स्थानों में स्वामी विवेकानंद के सांस्कृतिक और सांकेतिक बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जहां-जहां उन्होंने भ्रमण किया। ताकि देसी, विदेशी पर्यटकों को इन स्थलों की जानकारी हो सके और अध्ययनरत और शोध छात्रों को इसका लाभ मिल सके।
स्वामी विवेकानंद ने 1890 से 1902 के बीच कुमाऊं के विभिन्न स्थानों का भ्रमण किया था। संस्कृति विभाग ने कुमाऊं यात्रा के दौरान स्वामी विवेकानंद ने जिन स्थानों में अपने पद चिन्ह रखे थे उन जगहों पर सांस्कृतिक और सांकेतिक बोर्ड लगाने शुरू कर दिए हैं। इन जगहों में नैनीताल जिले के नैना देवी मंदिर धारी डाक बंगला, पहाड़ पानी, काठगोदाम, अल्मोड़ा जिले में काकड़ीघाट, विवेकानंद शिला करबला, अंबादत्त जोशी बगीचा, लाला बद्री शाह निवास, कसार देवी, अल्मोड़ा बाजार, बिनसर डाक बंगला, जीआईसी, थॉमसन हाउस, अंग्रेेजी क्लब (आफिसर मैस), ओकले हाउस (निवेदिता काटेज), स्याही देवी, मोरनौला डाक बंगले के अलावा बागेश्वर में देवलधार स्टेट और चंपावत में धूनाघाट, अद्वैत आश्रम मायावती, चंपावत डाक बंगला, दयूड़ी डाक बंगला और टनकपुर शामिल हैं।
इन जगहों पर बोर्ड लगाने का काम पुरातत्व विभाग कर रहा है। संस्कृति विभाग का मानना है कि कुमाऊं में देसी, स्थानीय पर्यटकों के अलावा काफी संख्या में विदेशी पर्यटक भी भ्रमण पर आते हैं। क्योंकि स्वामी विवेकानंद दुनिया भर में प्रख्यात हैं और उनके अनुयायियों की संख्या भी काफी ज्यादा है। इसलिए उन्होंने जहां जहां भ्रमण किया उन स्थानों को पर्यटकों की नजरों में लाया जा रहा है।
अल्मोड़ा पहुंची स्वामी की 10 फुट छह इंच ऊंची मूर्ति
अल्मोड़ा। अल्मोड़ा ब्राइट एंड कार्नर में स्थापित होने वाली स्वामी विवेकानंद मूर्ति भी कोलकाता से पहुंच गई है। रामकृष्ण कुटीर के प्रबंधक माधवानंद ने बताया कि कोलकाता में निर्मित मूर्ति फाइबर ग्लास की बनी हुई है और करीब 10 फुट छह इंच ऊंची है। इसे जल्द ही ब्राइट एंड कार्नर पर स्थापित कर दिया जाएगा।