दुल्हा-दुल्हन की तरह सजाया गया पेड़ों को
विवाह से पूर्व मेहंदी, हल्दी की रस्म हुई। इसके बाद विवाह के लिए पीपल के पेड़ को दूल्हा और वट के पेड़ को दुल्हन की तरह सजाया गया था। समधी मिलन समारोह भी हुआ। जिस प्रकार से लड़के लड़कियों की शादी होती है, ठीक इसी तरह से विधि विधान के साथ पीपट और वट वृक्ष की शादी कराई गई।
विधायक मेहरा सहित कई गांवों के लोग बने अनोखी शादी के साक्षी
पेड़ों की इस अनोखी शादी के लिए विधायक सहित कई गांव के लोगों को आमंत्रण भेजकर बुलाया गया। शादी में शामिल होने के लिए चौकुना, सिल्पड़, भाबू, नौगांव, दाड़िमी, सीम, बरम, मझाऊं, थामथोली, खड़ियानौली, बाराकोट, नौगांव, बिरखम, पुभाऊं से काफी संख्या में लोग पहुंचे।
बोले ग्रामीण
पीपल (विष्णु/ब्रह्मा प्रतीक) और वट (शिव प्रतीक) की शादी एक पवित्र आध्यात्मिक और पर्यावरण-संरक्षण अनुष्ठान है। इसे हरिशंकरी का विवाह भी कहा जाता है। इसे करने से सुख-समृद्धि, लंबी आयु और संतान प्राप्ति की मान्यता है।
राजेंद्र सिंह धानक राजू, क्षेत्र पंचायत सदस्य चौकुना
यह परंपरा लोगों को वृक्षों के प्रति जागरूक करने और पर्यावरण के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। आज जिस तरह से पेड़ों का कटान हो रहा है वह चिंताजनक है। धरा को हरा भरा रखने के लिए पेड़ों को बचाना जरूरी है।
कला बिष्ट, शिक्षिका प्राथमिक स्कूल सैनोली