दशहरे पर अल्मोड़ा में रावण परिवार के दो दर्जन से अधिक पुतलों की बैंड बाजों के साथ भव्य शोभायात्रा निकली। रावण परिवार के पुतलों को देखने के लोग उमड़ पड़े। लोगों ने बाजारों में मार्ग के किनारे, घरों की छतों से खड़े होकर पुतलों का जुलूस देखा।
पुतला कमेटियों के सदस्य ढोल नगाड़ों के बीच अपने-अपने पुतलों के आगे नाच रहे थे। देर रात स्टेडियम में रावण परिवार के पुतले पहुंचे। वहां आतिशबाजी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद पुतलों को जलाया गया। इससे पहले शिखर तिराहे पर मुख्य अतिथि वरिष्ठ रंगकर्मी सदानंद पांडे ने पुतलों की शोभायात्रा का उद्घाटन किया।
अल्मोड़ा दशहरा महोत्सव समिति के संयोजन में शहर में विभिन्न पुतला कमेटियों द्वारा तैयार किए गए पुतले दोपहर बाद मालरोड में पालिका शॉपिंग कांप्लेक्स में एकत्र हुए। यहां से पुतलों की भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई। शोभायात्रा में सबसे आगे ताड़िका का पुतला था। इसके अलावा प्रहस्त, निकुंभ, रावण, अहिरावण, कुंभकर्ण, मेघनाथ, देवांतक, अक्षय कुमार, कालकेतु, सुबाहु, नवरांतक, मारीच, खर, दूषण, अतिकाय, लवणासुर, ब्रिकासुर, वीरत, संभासुर समेत रावण परिवार के 28 पुतले शामिल थे। शोभा यात्रा के सबसे पीछे नंदादेवी रामलीला कमेटी का राम डोला चल रहा था।
पुतलों के साथ संबंधित पुतला कमेटियों से जुड़े युवाओं की टोलियां बैंड बाजे के साथ नृत्य करते हुई चल रही थी। बाहरी क्षेत्रों से भी पर्यटक और अन्य लोग काफी संख्या में दशहरा महोत्सव देखने पहुंचे थे। मार्ग के दोनों ओर, घरों और ईमारतों की छत में खड़े होकर लोगों ने पुतलों का जुलूस देखा। रात को पुतले स्टेडियम पहुंचे। वहां पुतला को जलाया गया। स्टेडियम में इस दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद थे।