रानीखेत (अल्मोड़ा)। शासन से पैसा मजूर होने के बावजूद ग्रामीणों के विरोध की वजह से चिलियानौला और ताड़ीखेत में नलकूपों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में इन इलाकों में ताड़ीखेत-गगास और चिलियानौला ग्राम समूह पेयजल योजना से आपूर्ति होती है। ताड़ीखेत में ऋषिगाड़ योजना भी है। इसके बावजूद यहां आए दिन पानी की कमी रहती है। कमी को दूर करने के लिए ही ट्यूबवेल लगाने का निर्णय लिया गया था।
ताड़ीखेत सहित आसपास के कुछ गांवों के लिए तीन पेयजल योजनाएं हैं लेकिन इसके बावजूद भी यहां पानी की भारी किल्लत रहती है। ताड़ीखेत विकास संघर्ष समिति और स्थानीय ग्रामीण लगातार पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग करते रहे थे। उनका कहना था कि यदि ट्यूबवेल लग जाता तो ताड़ीखेत बाजार, तौड़ा, ऐराड़ी गांव में पानी की दिक्कत दूर हो जाती। ताड़ीखेत क्षेत्र के लिए ऋषिगाड़ पेयजल योजना, तिपौला पंपिंग योजना और ताड़ीखेत गगास पेयजल योजना से आपूर्ति कराई जाती है। इधर, कुछ माह पूर्व ताड़ीखेत और चिलियानौला के लिए ट्यूबवेल स्वीकृत हुए। ताड़ीखेत में ट्यूबवेल के लिए 1.65 करोड़ और चिलियानौला के लिए 1.35 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए।
ताड़ीखेत में भू वैज्ञानिकों ने पेट्रोल पंप के पास, सौनी मोटर मार्ग और श्रद्धानंद मैदान के पास सर्वे किया। श्रद्धानंद मैदान के पास पानी मिला लेकिन ग्रामीणों ने इसका पुरजोर विरोध कर दिया है। उनका कहना है कि उनके पारंपरिक स्रोत इससे सूख जाएंगे। चिलियानौला में भी जय जवान जय किसान पार्क, डिग्री काॅलेज के समीप सर्वे में पानी नहीं मिला। हरड़ा धारा के समीप पानी मिला है, लेकिन विभाग को यहां भी ग्रामीणों के विरोध की सूचना मिली है। इस वजह से फिलहाल ट्यूबवेल का मामला खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। बता दें कि हर साल गर्मियों में इन क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत रहती है। लोग पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं।
कोट
ताड़ीखेत में मैदान के पास पानी मिला, लेकिन ग्रामीण टयूबवेल का विरोध कर रहे हैं। चिलियानौला में हरड़ा धारा के समीप पानी मिला। यहां भी ग्रामीण विरोध कर रहे हैं। हरड़ा धारा में स्थल में मैं स्वयं निरीक्षण करूंगा और फिर मशीन भेजुंगा। ग्रामीणों की सहमति बनी तो आगे काम किया जाएगा। ताड़ीखेत में ट्यूबवेल के साथ ही एक स्रोत की मरम्मत का कार्य भी होना है।
-सुरेश ठाकुर, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान रानीखेत।