अलग उत्तराखंड बनने के बाद आशा थी कि राज्य में पर्यटन युवाओं के लिए रोजगार का जरिया बनेगा, लेकिन प्रदेश में सत्तारूढ़ रही सरकारों की ओर से पर्यटक स्थलों को विकसित करने के लिए कोई खास प्रयास नहीं हो रहे हैं।
अल्मोड़ा नगर समेत आसपास के पर्यटन स्थल विकसित नहीं किए गए हैं। अल्मोड़ा नगर के कलक्ट्रेट से पांडेखोला विकास भवन, बानरी देवी, स्याहीदेवी और कसारदेवी को रोप-वे से जोड़ने की सरकार ने घोषणा की थी, लेकिन इस मामले में कोई प्रगति नहीं हुई है।
पर्यटन विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव शासन और निदेशालय को भेजा है। इस पर शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
नगर में कलक्ट्रेट, अल्मोड़ा जेल भवन, राजकीय संग्रहालय, प्रधान डाकघर, टैगोर हाउस समेत कई ऐतिहासिक और प्राचीन भवन हैं, लेकिन इन भवनों और स्थलों के बारे में जानकारीपरक बोर्ड संबंधित विभागों ने किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं लगा रखे हैं।
जिससे बाहर से आने वाले पर्यटकों को इनके बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है। शहर से लगे पर्यटक स्थलों की दूरी और उपयोगिता के बारे में भी कोई सूचनात्मक और संकेतात्मक बोर्ड शहर में नहीं लगे हैं। कई बार पर्यटक राहगीरों से इन स्थलों के बारे में जानकारी लेने को मजबूर होते हैं।