अल्मोड़ा। देश में स्वच्छ भारत अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण के दावे हो रहे हैं लेकिन नगर में कई साल से डंप कूड़े और रोज बढ़ रहे इसके ढेर से पर्यावरण की सेहत बिगड़ सही है। रीसाइकिल प्लांट को पर्यावरणीय स्वीकृति न मिलने से ट्रंचिंग ग्राउंड में कई साल से डंप बाइस हजार मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण करना चुनौती बन गया है।
नगर सहित जिले के बड़े बाजारों से निकलने वाले कूड़े के निस्तारण के लिए अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ हाईवे चितई मंदिर के पास ट्रंचिंग ग्राउंड बनाया गया है। करीब 15 साल से यहां डंप हो रहे कूड़े का निस्तारण नहीं हो सका है जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। हाईवे से लगी भूमि, चितई मंदिर के पास और हरे-भरे जंगलों के बीच बने ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप कूड़े को रीसाइकिल करने के लिए प्लांट लगाने के प्रस्ताव को पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिल सकी।
ऐसे में नगर सहित जिले के बड़े बाजारों से निकलने वाले 17 टन से अधिक कूड़े के रोज यहां पहुंचने से इसका ढेर रोजाना बढ़ता जा रहा है जो पालिका के साथ ही आम लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ा रहा है। इससे उठने वाली दुर्गंध से वातावरण प्रदूषित हो रहा है। इससे आसपास रहने वाले, हाईवे पर चलने वाले लोग और चितई पहुंचने वाले पर्यटक खासे परेशान हैं।
पुराने कूड़े को रीसाइकिल करने के लिए छह माह पूर्व भेजी गई थी डीपीआर
अल्मोड़ा। सालों से डंप कूड़े के निस्तारण के लिए रीसाइकिल प्लांट स्थापित करना मुश्किल है। ऐसे में पालिका श्रमिकों के सहारे इसे रीसाइकिल करने के लिए छह माह पूर्व एक करोड़ बीस लाख रुपये की डीपीआर शासन में भेजी थी जिसे स्वीकृति का इंतजार है।
नए ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए नहीं मिल रही भूमि
अल्मोड़ा। चितई के पास बने ट्रंचिंंग ग्राउंड में कूड़े का ढेर बढ़ने और इसके निस्तारण को प्लांट के लिए पर्यावरणीय संस्तुति न मिलने से पालिका के लिए नया ट्रंचिंग ग्राउंड बनाना मजबूरी बन गया है लेकिन इसके लिए जमीन खोजना चुनौती बना है। तीन साल में पालिका ने जिले के छह स्थानों पर भूमि की तलाश की लेकिन पर्यावरणीय मानकों की कसौटी पर यह जमीन खरी नहीं उतर पा रही है। इसके लिए पालिका के साथ ही प्रशासन भी परेशान है।
निश्चित तौर पर ट्रंचिंग ग्राउंड में डंप कूड़े का निस्तारण करना चुनौती है। इसको रीसाइकिल करने के लिए डीपीआर भेजी गई है। उसकी मंजूरी का इंतजार है। इसको ब्लैक होल तकनीक से रीसाइकिल करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। - भरत त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका, अल्मोड़ा।