मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट की कर्मस्थली होने के बावजूद उपमंडल क्षेत्र के एकमात्र राजकीय अस्पताल की व्यवस्थाएं राम भरोसे है। एक करोड़ की लागत से बने ट्रामा सेंटर के भवन का लोकार्पण भी सिर्फ नौटंकी साबित हुई। आठ साल पूर्व लोकार्पण होने के बाद भी इसके लिए जरूरी उपकरण, डॉक्टरों का पैनल तक उपलब्ध नहीं है। खाली भवन डॉक्टरों का अस्थायी निवास बना हुआ है। दुर्घटनाओं के गंभीर घायल रेफर हो रहे हैं।
राजकीय अस्पताल में 15 साल पूर्व 2000 में ट्रामा सेंटर को मंजूरी मिली। एक करोड़ की लागत से भवन बना। सात साल पूर्व 2009 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने अल्मोड़ा आगमन पर ट्रामा सेंटर का अल्मोड़ा से लोकार्पण तक कर दिया, लेकिन इसके बावजूद केंद्र के संचालन के लिए ढेले भर की भी प्रगति नहीं हुई है।
वर्तमान में यह केंद्र डॉक्टरों का अस्थायी निवास बना है जबकि प्रदेश में सत्ता के दो बड़े केंद्र मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट की यह कर्मस्थली है। क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन दूरदराज से इलाज को आने वाले रोगियों को रेफर कर दिया जाता है। कई रोगी हायर सेंटर पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नुमाइंदों को जनता को गुमराह करने के बजाए ट्रामा सेंटर की जरूरतों को पूरा करना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट का कहना है कि ट्रामा सेंटर के संचालन के लिए कई बार वह सरकार पर दबाव बना रहे हैं, लेकिन सरकार सुन नहीं रही रही। पूर्व विधायक करन माहरा ने बताया कि इसके लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत से वार्ता हुई है। शीघ्र ही इसका संचालन होगा।