क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। छह तहसीलों वाले इस उपमंडल में ट्रामा सेंटर का आज तक संचालन नहीं हो सका है, जबकि इस क्षेत्र में सबसे अधिक वाहन दुर्घटनाएं होती हैं। सात साल पूर्व रानीखेत अस्पताल में ट्रामा सेंटर का भवन बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन डॉक्टर और उपकरण नहीं पहुंचे। जनप्रतिनिधियों को भी इससे कोई सरोकार नहीं है, बार-बार सरकार के सम्मुख इस समस्या को रखने की ही बात होती है।
प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट जैसे कद्दावर नेताओं की कर्मस्थली होने के बावजूद उपमंडल क्षेत्र के एकमात्र राजकीय अस्पताल की दशा नहीं सुधर पा रही है। अस्पताल में पहले से ही डॉक्टरों की कमी है। वर्षों से ईएनटी विशेषज्ञ का पद खाली है, इमरजेंसी डॉक्टर नहीं है। अस्पताल एकमात्र फिजीशियन के सहारे चल रहा है जबकि यहां गैरसैंण जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्र से भी रोगी उपचार को पहुंचते हैं, दूसरी तरफ इस क्षेत्र की सड़कों में सबसे अधिक दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन ट्रामा सेंटर का संचालन नहीं हो रहा है। 16 साल पहले यहां ट्रामा सेंटर स्वीकृत हुआ। 2009 में भवन का शिलान्यास किया गया, लेकिन तब से न तो डॉक्टर पहुंचे हैं और ना ही उपकरण, भवन डाक्टरों का आवास बना हुआ है। नेता
प्रतिपक्ष अजय भट्ट का कहना है कि ट्रामा सेंटर का संचालन शीघ्र हो इसके लिए वह सरकार पर दबाव बनाएंगे। पूर्व विधायक करन माहरा कहते हैं कि इस मसले को लेकर वह पुन: मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। सीएमएस डॉ. डीएस नेई का कहना है कि कई बार शासन को पत्र भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।