उत्तरांचल परिवहन मजदूर संघ शाखा इकाई की मासिक बैठक में वक्ताओं ने चालकों के अभाव में बसों के कार्यशाला में खड़े रहने पर आक्रोश जताया। उन्होंने कहा कि बसें खड़ी रहने से परिवहन निगम को प्रतिदिन तीन से साढ़े तीन लाख का घाटा हो रहा है। उन्होंने शासन से डिपो को प्राथमिकता के आधार पर 40 चालक और 30 परिचालक उपलब्ध कराने की भी मांग की है।
बस स्टेशन के कक्ष में हुई इस बैठक में वक्ताओं ने कहा कि चालकों की कमी से कई नई बसें कार्यशाला में खड़ी की हुई हैं। इससे निगम को हर रोज लाखों का घाटा उठाना पड़ रहा है। वक्ताओं ने कहा कि धीमी गति से कार्य होने के कारण अंतर्राज्यीय बस अड्डे का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो सका है। उन्होंने इस कार्य में श्रमिकों की वृद्धि करते हुए तीन माह के भीतर बस अड्डे का निर्माण पूरा करने की मांग की है। वक्ताओं ने वाह्य स्रोत कार्मिकों, संविदा कर्मचारियों को नियमित किए जाने और नियमित किए जाने तक उन्हें समान कार्य का समान वेतन देने, परिवहन निगम को राजकीय रोडवेज का दर्जा देते हुए बजटीय व्यवस्था करने की मांग की।
बैठक में सेवा निवृत्त कर्मचारियों, मृतक आश्रितों को देय भुगतान प्राथमिकता के आधार पर देने की मांग भी उठाई गई है। इसके अलावा पूर्ववर्ती सरकार द्वारा वृद्धजनों को नि:शुल्क यात्रा, चार धाम यात्रा, नि:शुल्क छात्रा पास पर बकाया तीस करोड़ की धनराशि का भुगतान भी परिवहन निगम को कराने की मांग की है। बैठक में निगम द्वारा क्रय की गई 483 बसों के सही मानकों में उतरने के लिए जांच की मांग भी उठाई गई। इस दौरान प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर हर्ष भी व्यक्त किया गया। बैठक में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मदन सिंह बिष्ट, भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शेखरानंद पांडे, क्षेत्रीय संयुक्त मंत्री मोहन राम, कुंदन लाल, भगवंत महरा, चंदनी पांडे, मीना कोरंगा, चंद्रशेखर जोशी, सुनील कुमार, विशन सिंह, गणेश सिंह रौतेला ने विचार रखे।