रानीखेत (अल्मोड़ा)। आतंकवाद और विद्रोह से निपटने के लिए भारत और अमेरिकी सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास अब चरमसीमा पर पहुंच गया है। दोनों सेनाओं के जांबाजों ने चौबटिया के घने जंगलों में युद्धाभ्यास का प्रदर्शन किया। इस दौरान आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया गया।
मुखबिर की सूचना पर चौबटिया गांव (काल्पनिक नाम) में छिपे चार आतंकियों को जांबाजों ने सर्च अभियान चलाकर मार गिराया। सर्च अभियान के दौरान सेना को ग्रामीणों का विरोध भी झेलना पड़ा। संयुक्त युद्धाभ्यास में अमेरिका और भारत दोनों देशों के अधिकारी और जवान युद्ध के अनुभवों को साझा कर रहे हैं।
जंगल में छिपे आतंकियों को ढूंढ निकालने, उनके द्वारा जमीन पर बिछाए गए माइंस आदि को निष्प्रोज्य करना, फायरिंग का अभ्यास सहित तमाम गतिविधियों का भी प्रदर्शन हुआ। युद्धाभ्यास के दौरान चली तमाम गतिविधियों का प्रदर्शन करते वक्त सैनिकों ने भी शानदार कार्य किया। वहां बसाए गए चौबटिया गांव में कुछ ग्रामीणों द्वारा छोटे से लालच के लिए चार आतंकियों को शरण दी।
इसी दौरान सेना के मुखबिर ने वहां आतंकवादी छिपे होने की सूचना दी। सेना ने सर्च अभियान चलाया। सबसे पहले गांव के मुखिया को बुलाकर ग्रामीणों को एकत्रित किया गया। इसके बाद एक एक कर हर मकान की तलाशी ली। भवनों की तलाशी से ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया, सेना गो बैक के नारे तक लगाए गए।
सर्च के दौरान दो भवनों के अंदर ‘आतंकी’ छिपे थे। सेना ने शानदार तकनीक, युद्धकौशल का सहारा लेते हुए ‘आतंकियों’ को मार गिराया। देर शाम रस्सियों के माध्यम से खाइयों को पार करने, रॉक क्लाइंबिंग सहित तमाम गतिविधियों का भी प्रदर्शन किया गया। 17 सितंबर से शुरू हुआ यह अभ्यास 27 सितंबर तक होगा।
रानीखेत। विद्रोहियों और आतंकियों के साथ होने वाली मुठभेड़ की घटनाओं, ऐसे वक्त में घायल होने वाले जवानों को त्वरित उपचार दिलाने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सुनसान इलाकों में उपलब्ध बांस, अन्य लकड़ियों से स्ट्रक्चर बनाकर उन्हें प्राथमिक उपचार, सघन चिकित्सा उपलब्ध कराने के लिए दोनों देशों की सेनाएं अनुभवों को साझा कर रही हैं।