अल्मोड़ा। जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल में ईको स्मार्ट आदर्श ग्राम परियोजना के अंतर्गत कनेली, बिसरा, कुज्याड़ी और दिलकोट गांवों के किसानों को संरक्षित खेती का प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि किसान बेमौसमी सब्जी उत्पादन, जैविक और संरक्षित खेती कर आय बढ़ाएं।
वैज्ञानिक डॉ. शैलजा पुनेठा ने संरक्षित खेती के लिए पॉलीहाउस, पॉलीटनल, नैट हाउस और जैविक खेती की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में संरक्षित खेती की काफी संभावनाएं हैं।
जैविक उत्पादों की बाजार में काफी मांग है। डॉ. गंगादत्त पांडे ने पॉलीहाउस के रखरखाव और प्रबंधन, जैविक खेती की तकनीक, वर्मी कंपोस्ट, जैविक खाद, उन्नत बीजों के उपयोग और फसल चक्र के बारे में बताया।
मास्टर ट्रेनर डीएस बिष्ट ने पॉलीहाउस निर्माण की जानकारी दी। ज्योली गांव के प्रगतिशील कृषक त्रिलोक सिंह सलाल और जमन सिह बिष्ट ने अपने-अपने अनुभव रखे।
कनेली-बिसरा के प्रधान नंदन उपाध्याय, प्रधान कुज्याड़ी ममता जोशी, बीडीसी सदस्य खड़क सिंह, परितोष जोशी ने प्रशिक्षण को किसानों के लिए उपयोगी बताया। राजेंद्र कांडपाल ने ग्रामीण उत्पादकों को समूह के माध्यम से विपणन की जानकारी दी। प्रशिक्षण में 56 किसानों ने भाग लिया।