अल्मोड़ा। केंद्र और प्रदेश सरकारों के मजदूर, किसान, जन विरोधी नीतियों के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और फेडरेशनों के संयुक्त आह्वान पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े लोगों ने नगर के चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में धरना दिया। उन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
धरना स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि जब कोरोना महामारी को रोका जा सकता था तब केंद्र की मोदी सरकार नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम कर रही थी। सरकार कोरोना के दुष्परिणामों से बेखबर विपक्ष की सरकारों को गिराने में जुटी थी। साथ ही अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए तब्लीगी जमात के नाम पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का काम कर रही थी। जब कोरोना महामारी बढ़ने लगी तो आनन-फानन में लॉकडाउन कर देश में आर्थिक नाकेबंदी की स्थिति बना दी।
महामारी की आड़ में लॉकडाउन का लाभ लेकर मजदूर, किसान, बेरोजगार और आम जनता के खिलाफ अध्यादेश और बाद में संसद में कानून पारित कर देश की जनता पर थोपा गया। मजदूर विरोधी श्रम कानून मानसून सत्र के ठीक अंत में पारित किए गए। उन्होंने बेरोजगारों को स्थायी रोजगार देने, न्यूनतम मजदूरी 21 हजार रुपये देने, निजीकरण और ठेका प्रथा बंद करने, आशा, भोजन माता, पीटीसी, ग्राम प्रहरी को 21 हजार रुपये प्रतिमाह देने, महंगाई और बेरोजगारी पर लगाम लगाने, गैर करदाताओं को 7500 रुपया प्रति माह छह माह तक देने की मांग की।
प्रदर्शन करने वालों में दीवान कार्की, भुवन तिवारी, खीम सिंह, शिव नाथ गोस्वामी, डूंगर राम, पूजा बगड़वाल, ममता तिवारी, चंद्रा बिष्ट, तारा चौहान, नीमा देवी, तुलसी भट्ट, नंदन सिंह, अर्जुन, आनंदी मेहरा, रूपा देवी, जानकी देवी, विजय लक्ष्मी, उमा आगरी, ममता भट्ट, कौशल्या बिष्ट, सुनीता पांडे, यूसुफ तिवारी, स्वप्निल पांडे, अरुण जोशी, दिनेश पांडे, आरपी जोशी आदि शामिल हैं।