वन विभाग जिले में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देगा। ईको टूरिज्म के लिए धौलछीना-वृद्ध जागेश्वर-जागेश्वर-झांकरसैम-धौलादेवी और धौलछीना-बिनसर-डीनापानी-पथरिया-कौसानी ट्रैकिंग रूट विकसित करेगा। इन रूटों पर ईको हट्स और कैंटीन खोली जाएंगी। आसपास रहने वाले ग्रामीणों को पेइंग गेस्ट रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे ग्रामीणों की आय में भी बढ़ोतरी होगी और क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
वन विभाग के अधीन धौलछीना से वृद्ध जागेश्वर तक पुराना मार्ग है। इस प्राचीन मार्ग को वन विभाग अब ट्रैकिंग रूट के रूप में विकसित कर ईको टूरिज्म को बढ़ाने के लिए काम करेगा। धौलछीना से वृद्ध जागेश्वर, जागेश्वर, झांकरसैम, धौलादेवी तक ट्रैकिंग रूट बनाया जाएगा। जबकि दूसरा ट्रैकिंग रूट धौलछीना से बिनसार, डीनापानी, पथरिया होते हुए कौसानी तक बनाया जाएगा। इन ट्रैकिंग रूटों में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए निश्चित स्थानों पर ईको हट्स और कैंटीन भी खोली जाएंगी। इच्छुक स्थानीय ग्रामीण पेइंग गेस्ट भी खोल सकेंगे।
सिविल सोयम वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी आरसी शर्मा ने बताया कि दोनों ट्रैकिंग रूटों को विकसित करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये खर्च होंगे। वन निगम इसके लिए फंडिंग करेगा। इन रूटों को सोसाइटी मोड में संचालित किया जाएगा। स्थानीय लोगों की सोसाइटी बनाई जाएगी, जो इन ट्रैकिंग रूटों को संचालित करेगी। वन निगम ट्रैकिंग रूटों का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। जिसे शासन को भेजा जाएगा। बजट मिलने के बाद ट्रैकिंग रूट विकसित किए जाएंगे।