पर्यटन सीजन शुरू हो गया है, लेकिन संबंधित विभागों की तैयारियां अधूरी हैं। पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले कई मार्ग बदहाल हैं। मुख्य रूप से प्रमुख पर्यटन स्थल बिनसर जाने वाली सड़क की हालत इतनी खराब है कि वहां पर्यटकों का पहुंचना मुश्किल हो रहा है। तीन किमी क्षेत्र में सड़क इतनी खतरनाक हालत में है कि किसी तरह बिनसर पहुंचने वाला पर्यटक दोबारा वहां नहीं आने की कसम खाकर लौटता है। जिससे इस क्षेत्र में पर्यटन व्यवसाय चौपट हो रहा है।
गर्मी शुरू होने के साथ ही पहाड़ में पर्यटन सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन संबंधित विभागों की ओर से पर्यटन सीजन की कोई खास तैयारियां नहीं की गई हैं। पर्यटन स्थलों तक जाने वाली कई सड़कों की हालत खराब है। बिनसर अभ्यारण्य तक जाने वाली सड़क की हालत कफड़खान से लेकर बिनसर तक बहुत खराब है। इस 11 किमी मार्ग के सुधारीकरण के लिए टेंडर हो चुके हैं।
दो साल पहले जनप्रतिनिधियों ने सुधारीकरण कार्य का धूमधाम से शिलान्यास भी किया, लेकिन आज तक काम नहीं किया गया है। बिनसर की तरफ अंतिम तीन किमी क्षेत्र में पूरी सड़क गड्ढों से पटी है। बुरुशकोटी के पास भी सड़क खतरनाक बनी हुई है। यहां आने वाले पर्यटकों के वाहन रास्तों में जगह-जगह फंसते हैं। कई बार दुर्घटनाएं भी हो रही हैं।
बिनसर में कुमाऊं मंडल विकास निगम के पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक गोपाल बिष्ट ने बताया कि इस सड़क से होकर आने वाले पर्यटक यहां दोबारा नहीं आते। जिससे पर्यटन व्यवसाय पर काफी असर पड़ रहा है। यहां कई होटल, रिसॉर्ट के अलावा आसपास के गांवों में होम स्टे सुविधाएं भी हैं।
उधर कौसानी को जोड़ने वाले मार्ग की दशा में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। एनटीडी से कसारदेवी को जाने वाले मार्ग पर एनटीडी, कफड़खान के समीप गड्ढे बने हुए हैं। आरतोला से जागेश्वर धाम को जोड़ने वाले तीन किमी मार्ग की हालत तो काफी खराब बनी हुई है। वहीं अल्मोड़ा से शीतलाखेत को जाने वाली सड़क की दशा भी खस्ता है।
शहर, कस्बों और अन्य स्थानों पर शौचालयों की स्थिति भी ठीक नहीं है। सूचना देने के लिए सड़कों के किनारे संकेत बोर्ड तक नहीं लगे हैं। पार्किंग के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं है। इस कारण बाहर से आने वाले पर्यटकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कार्यभार ग्रहण किए हुए कुछ ही दिन हुए हैं। भ्रमण कर पर्यटन स्थलों के विकास के लिए जानकारी जुटाई जाएगी। अल्मोड़ा, रानीखेत और कौसानी में पर्यटक सूचना केंद्र हैं। सूचनात्मक बोर्ड लगाने, पार्किंग स्थल चिन्हीकरण कर प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। जिला स्तरीय कमेटी गठित कर लोगों से सुझाव लेकर पर्यटन विकास को गति दी जाएगी। - राहुल चौबे, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, अल्मोड़ा।