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नाम से खिंचे आते हैं सैलानी और यहां झेलते हैं परेशानी

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रानीखेत का प्रख्यात गोल्फ मैदान। - फोटो : amar ujala
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प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण, सुंदर दृश्यों के कारण ही रानीखेत को अंग्रेजों ने पर्यटन नगरी का दर्जा दिया था, लेकिन हमारे हाकिमों ने यहां की सुंदरता को निखारने के बजाय, इसकी उपेक्षा कर रसातल में धकेल दिया है। राज्य बनने के बाद पर्यटन विकास में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन यातायात अव्यवस्था, मनोरंजन के साधनों, पार्किंग स्थलों का अभाव और मूलभूत सुविधाओं की कमी उम्मीदों पर भारी पड़ गईं। पिछले पांच सालों का आंकड़ा लें तो हर साल देसी-विदेशी सैलानियों की संख्या में इजाफा होता है, लेकिन वह लोग यहां अधिक दिन तक टिक नहीं पाते।

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 होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष हिमांशु उपाध्याय का कहना है कि नेताओं में विकास की सोच नहीं है। कुदरत ने रानीखेत को असीम सौंदर्य बख्शा है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। होटल व्यवसायी जगदीश अग्रवाल कहते हैं कि  पर्यटन नगरी में पर्यटकों के मनोरंजन के साधन तक उपलब्ध नहीं हैं।

बाहर से सैलानी नाम सुनकर आते हैं और एक ही दिन में बोर होकर लौट जाते हैं। नगर की यातायात व्यवस्था राम भरोसे है, आए दिन अव्यवस्था के चलते जाम लगता है और पर्यटक कड़वे अनुभव लेकर लौटते हैं। सड़कें खराब हालत में हैं। चार धाम वाले पर्यटक रानीखेत होकर गुजरें, सरकार को इसके लिए प्रयास करने चाहिए। नए पर्यटन स्थलों का विकास, पुराने पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण करना भी जरूरी है। दलमोटी में मृग विहार निर्माण के लिए पर्यटन विभाग को प्रयास करने चाहिए।
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2015 से अब तक पहुंचे देसी-विदेशी सैलानियों की संख्या
2015 में देसी 103448, विदेशी 738
2016 में देसी 1037978, विदेशी 1332
2017 में देसी 1045233, विदेशी 1514
2018 में देसी 1048212, विदेशी 1683
2019 में देसी 25000, विदेशी 115 अभी तक।
 

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