चिनार के पौधों की नर्सरी दिखाते रेंजर।
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सब कुछ ठीक रहा तो शीघ्र ही पर्यटन नगरी में चिनार के पेड़ अपनी शोभा बिखेरेंगे। यहां कालिका स्थित अनुसंधान वन क्षेत्र में चिनार के पौध की नर्सरी तैयार हो रही है। चार से पांच माह में यह पौध रोपण के लिए तैयार हो जाएंगे। कुमाऊं क्षेत्र में सरोवर नगरी नैनीताल में ही चिनार के कुछ वृक्ष बताए जा रहे हैं।
पेड़ की छाल से जहां तमाम औषधियां बनती हैं, वहीं इसकी लकड़ी से सुंदर और टिकाऊ फर्नीचर भी तैयार किया जाता है।अनुसंधान वन क्षेत्र कालिका की हाईटेक नर्सरी में फिलहाल 500 पौधे तैयार किए जा रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी आशुतोष जोशी ने बताया कि चिनार के पेड़ तीन से चार हजार मीटर ऊंचाई वाले ठंडे प्रदेशों में होते हैं। जम्मू कश्मीर क्षेत्र में इनकी संख्या बहुत है।
पेड़ बेहद खूबसूरत होता है, इसकी खूबसूरती लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यदि यह प्रयोग सफल रहा तो रानीखेत में पर्यटकों को यह पेड़ आकर्षित करेंगे। उन्होंने बताया कि ब्रिटिशकाल में नैनीताल क्षेत्र में कुछ चिनार के पेड़ लगाए गए थे। चार से पांच माह के भीतर यह पौध विकसित हो जाएंगे, फिर इनका पूरे क्षेत्र में रोपण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि चिनार के पत्ती और छाल का प्रयोग तमाम तरह की औषधि बनाने में किया जाता है, जबकि पेड़ की जड़ से हेयरडाई बनाई जाती है।
30 से 90 फुट तक होती है चिनार पेड़ की ऊंचाई
रानीखेत। वन क्षेत्राधिकारी आशुतोष जोशी ने बताया कि शोभादार चिनार के पेड़ की ऊंचाई औसतन 30 से 90 फुट तक होती है। जम्मू कश्मीर के डल झील सहित आसपास के इलाकों में यह पेड़ अपनी शोभा बिखेरते हैं। रानीखेत क्षेत्र में दिसंबर में इन पेड़ों का रोपण किया जाएगा।