लमगड़ा विकासखंड के 17 तोकों में आज तक बिजली नहीं पहुंची है। सूर्य भगवान के बाद इन गांव के लोगों के लिए रोशनी का सहारा चीड़ के छिलके और प्राचीन युग से चले आ रहे मिट्टी तेल के लैंप हैं। इन गांवों में बिजली पहुंचाने की योजना कई बार बन चुकी है, लेकिन आज तक लाइन डालने का काम शुरूनहीं हुआ है।
लमगड़ा विकासखंड के अंतर्गत चखुडिया, खुटकामड़ा, पितना, रौशाल, वीड, कफरौली, दयौना, चौबटिया, खेती, नौली सहित करीब डेढ़ दर्जन तोकों में आज तक बिजली नहीं पहुंच सकी है।
देश को आजाद हुए भले ही 68 साल हो गए हों मगर अफसोस है कि आजाद भारत के यह गांव आज तक अंधेरे से आजाद नहीं हुए हैं। इन गांवों के बाशिंदे आज भी अंधेरे में रात गुजारने को विवश हैं।
बिजली नहीं पहुंचने के कारण इन गांवों में रहने वाले हजारों लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। खासकर विद्यार्थियों को काफी दिक्कतें होती है। शादी विवाह समारोह में भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सहकारी सस्ता गल्ला की दुकानों में कैरोसिन भी पर्याप्त मात्रा में नहीं आने से ग्रामीणों की दिक्कतें और भी बढ़ गई हैं। कैरोसिन नहीं मिलने के कारण कई बार ग्रामीणों के लैंप भी नहीं जलते हैं।