फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

धधक रहा तकुल्टी का जंगल

Fri, 10 Feb 2017 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, द्वाराहाट (अल्मोड़ा)।
विज्ञापन
बिटौर में लगी आग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। गर्मियों का मौसम शुरू होने से पहले ही क्षेत्र के जंगल आग से धधकने लगे हैं। यहां तकुल्टी वन पंचायत के जंगल में अपराह्न अचानक आग धधक उठी। देर शाम तक इसे बुझाने के लिए विभाग का कोई भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा था। तकुल्टी वन पंचायत के जंगल में अपराह्न अचानक आग धधक उठी। जंगल में प्रचंड आग लगी है, लेकिन इसे बुझाने के लिए मौके पर विभाग का कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था।
विज्ञापन


प्रचंड आग बस्ती की तरफ बढ़ रही है, लेकिन विभाग को इसकी कोई सुध नहीं है। क्षेत्र में 15 फरवरी के बाद वनाग्नि का सीजन शुरू होता है, लेकिन इस बार पहले ही वनाग्नि शुरू हो गई है। वनाग्नि रोकने के लिए विभाग तमाम तरह के दावे कर रहा है, लेकिन तकुल्टी के धधकते जंगल अव्यवस्थाओं की पोल खोल रहे हैं। ग्रामीणों ने वनाधिकारियों से जंगल की आग रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
वनाग्नि से निपटने के लिए तैयारियां शुरू

रानीखेत (अल्मोड़ा)। वन विभाग ने वनाग्नि से निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। इन दिनों मोटर मार्गों के किनारे कंट्रोल बर्निंग, फायर ड्रिल, फायर लाइनों की सफाई का कार्य चल रहा है। इसके तहत सड़कों के किनारे पड़ी सूखी पत्तियों और ज्वलनशील सामग्रियों को नष्ट किया जाता है। इससे गर्मियों में आग लगने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। वन पंचायतों में जागरूकता कार्यक्रमों की तैयारियां भी वन विभाग ने शुरू कर दी हैं।      
विज्ञापन


 हर साल वनाग्नि से लाखों हेक्टेयर जंगल जलते हैं, जबकि जड़ी, बूटी सहित तमाम वन संपदाओं को भी नुकसान पहुंचता है। रेंजर उमेश पांडे ने बताया कि वनाग्नि को लेकर विभाग पूरी तरह से सचेत है। वनों को आग से बचाने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। अधिक से अधिक महिला, नवयुवक मंगल दलों को जोड़कर वनाग्नि से निपटने में सहयोग लिया जा रहा है। क्रू स्टेशनों को सक्रिय किया जा रहा है।

फिलहाल सड़कों के किनारे, पैदल मार्गों पर कंट्रोल बर्निंग का कार्य चल रहा है। इसके तहत सड़कों के किनारे पड़ी सूखी पत्तियों, कूड़ा आदि को एकत्रित कर जला दिया जाता है, इससे वनाग्नि की घटनाएं काफी हद तक कम हो जाती हैं। रेंजर ने बताया कि कंट्रोल बर्निंग के दौरान विभाग के कर्मचारी पूरी आग बुझाकर लौटते हैं, उन्होंने बताया कि वनों को आग के हवाले करने वाले लोगों के खिलाफ विभाग सख्ती से निपटेगा। फायर वाचरों की तैनाती का कार्य भी शुरू कर दिया गया है।       

अल्मोड़ा। कृषि इंटर कॉलेज विजयपुर पाटिया में हुई अग्नि सुरक्षा गोष्ठी में वक्ताओं ने आग से जंगलों को होने वाले नुकसान की जानकारी दी। कहा कि इससे जहां पर्यावरण प्रदूषित होता है, वहीं मानव जीवन पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। गणानाथ के रेंजर शंकर दत्त पांडे ने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग से पेड़-पौधों, वन्य जीवों को नुकसान होता है जबकि इनकी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका है।

जंगलों को आग से बचाने के लिए सभी को सहयोग करना होगा। यदि किसी स्थान पर जंगलों में आग लगती है तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें। ग्रामीण भी जंगलों को आग से बचाने में सहयोग करें। जायका परियोजना में कार्यरत विशेषज्ञ ज्योत्सना खत्री ने मानव जनित अग्नि दुर्घटनाओं पर प्रकाश डाला। इस मौके पर इंदिरा गोस्वामी, वन रक्षक महेंद्र सिंह मटेला, गणेश चंद्र, पंकज बिष्ट, भुवन पांडे, कुंदन सिंह, मोहन राम आदि उपस्थित थे। गोष्ठी में भटगांव, पाटिया, विजयपुर, कोट्यूड़ा, मैचून, पिलखा के ग्रामीणों ने भाग लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें