अल्मोड़ा। जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ने लगा है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। तीन साल में पहली बार जिले में एक युवती सहित तीन लोग डेंगू से ग्रसित मिले हैं। दो की हालात स्थिर होने पर उन्हें चिकित्सकाें ने घर भेज दिया जबकि युवती को जिला अस्पताल में भर्ती करना पड़ा है।
जिले में डेंगू पांव पसारने लगा है। जानकारी के मुताबिक बीते बुधवार को तेज बुखार की शिकायत पर एक युवती सहित तीन लोग जिला अस्पताल पहुंचे। लक्षण मिलने पर तीनों की डेंगू की जांच की गई, जिसमें तीनों इससे ग्रसित मिले हैं। हालांकि डेंगू से ग्रसित दो लोग देहरादून और युवती हरिद्वार से यहां पहुंची हैं। लेकिन एक साथ तीन लोगों के डेंगू से ग्रसित मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में डेंगू की जांच बढ़ा दी है।
अस्पतालों में 80 से अधिक लोगों की हो रही है डेंगू जांच
अल्मोड़ा। मौसम परिवर्तन के चलते जिले में वायरल का प्रकोप बढ़ गया है और अस्पतालों में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। वहीं डेंगू के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में डेंगू की पहचान और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाया है। जिले के अस्पतालों में हर रोज 80 से अधिक मरीजों की डेंगू जांच हो रही है। राहत की बात यह है कि जिले में रहने वाले लोग डेंगू से ग्रसित नहीं मिल रहे हैं। जिले में डेंगू के तीन एक्टिव केस हैं, जिनकी ट्रेवल हिस्ट्री बाहर की है।
रानीखेत उप जिला चिकित्सालय, जिला और बेस में बने हैं डेंगू वार्ड
अल्मोड़ा। डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने डेंगू मरीजों के लिए रानीखेत उप जिला चिकित्सालय, जिला और बेस अस्पताल में डेंगू वार्ड बनाए हैं और प्रत्येक अस्पताल में 10-10 बेड लगाए गए हैं।
जिले में तीन मरीज डेंगू से ग्रसित मिले हैं, जिनकी ट्रेवल हिस्ट्री बाहर की है। तीनों का इलाज किया जा रहा है। डेंगू की पहचान के लिए अस्पतालों में जांच हो रही है। - डॉ. कमलेश जोशी, जिला मलेरिया अधिकारी, अल्मोड़ा।
अल्मोड़ा रही है मलेरिया के कारण की खोज करने वाले रोनाल्ड की जन्मस्थली
अल्मोड़ा। जिस मच्छर के कारण लोग मलेरिया और डेंगू की जकड़ में फंस रहे हैं, उसके कारणों की पहचान करने वाले महान वैज्ञानिक रोनाल्ड की जन्मस्थली अल्मोड़ा रही है। उनका जन्म जिला मुख्यालय के थामसन हाउस में हुआ था। मच्छर के काटने से मलेरिया फैलने की खोज करने पर उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 13 मई 1857 को रोनाल्ड रास का जन्म हुआ। 1889 में महामारी फैलने पर उन्होंने मलेरिया को लेकर शोध शुरू किया। अपनी मेहनत और लगन के बल पर उन्होंने शोध पूरा कर मलेरिया के कारणों की खोज की। उन्होंने मच्छर खासकर मादा एनाफिलीज के काटने से मलेरिया रोग का पता लगाया। इस खोज के आधार पर वर्ष 1902 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनकी इस खोज ने मलेरिया के उपचार में पूरे विश्व में क्रांति लाने का काम किया जिसे आज भी याद किया जाता है।
अल्मोड़ा में तीन सालों में एक भी डेंगू का मरीज नहीं आया सामने
अल्मोड़ा। जिले में बीते तीन सालों में एक भी डेंगू का मरीज सामने नहीं आया है। स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के मुताबिक तीन साल से यहां डेंगू का प्रकोप पूरी तरह थमा था। लेकिन फिर से यहां डेंगू ने दस्तक दी है, जिससे स्वास्थ्य विभाग के साथ ही आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।
डेंगू की रोकथाम के लिए नगर में फॉगिंग की मांग
अल्मोड़ा। अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद की बैठक में पूर्व सैनिकों ने जिले में बढ़ते डेंगू मरीजों की संख्या पर चिंता जताई। इस दौरान उन्होंने नगर पालिका से फॉगिंग और कीटनाशक के छिड़काव की मांग की।
पूर्व सैनिकों ने कहा कि जिले में डेंगू पांव पसार रहा है। ऐसे में पालिका को मच्छरों से निजात दिलाने के लिए फॉगिंग करनी होगी। उन्होंने जिले के गांवों में जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त पर भी चिंता जताई। कहा कि बाहरी लोग ग्रामीणों को लालच देकर जमीन की खरीद फरोख्त कर रहे हैं, जिसके प्रति सभी को जागरूक होना होगा। उन्होंने धारानौला, करबला से विकास भवन तक सिटी बस संचालित करने की भी मांग की।
इस मौके पर सेवानिवृत्त कैप्टन महेंद्र सिंह मनराल, परिषद अध्यक्ष सेवानिवृत्त सूबेदार आनंद सिंह बोरा, सुरेंद्र लाल टम्टा, पीजी गोस्वामी, केशव दत्त पांडे, त्रिलोक सिंह, विनोद गिरी, प्रकाश बोरा आदि मौजूद रहे।