अल्मोड़ा के विश्वनाथ श्मशान घाट पर पिता की चिता को मुखाग्नि देतीं सुनीता पांडे, भावना और भारती।
अल्मोड़ा। जिस पिता ने गोद में खिलाया, उनका हाथ पकड़कर चलना सीखा, उस पिता की अर्थी को जब तीनों बेटियों ने कंधा देकर अंतिम विदाई दी तो सभी की आंखें भर आईं। तीनों बेटियों ने पिता के शव को ना केवल कंधा दिया बल्कि विश्वनाथ श्मशान घाट पर उनकी चिता को मुखाग्नि भी दी।
अल्मोड़ा के रानीधारा निवासी एसबीआई से प्रबंधक पद से सेवानिवृत्त बसंत बल्लभ पांडे (85) का बुधवार को निधन हो गया था। वह पेंशनर एसोसिएशन के सचिव भी रह चुके हैं। कुछ समय पूर्व ही उनके पुत्र अधिवक्ता और पत्रकार दिनेश पांडे का निधन हो गया था। ऐसे में उनकी तीनों बेटियां सुनीता पांडे, भावना और भारती ने पिता की अर्थी को कंधा दिया।
तीनों बहनें शव यात्रा के साथ विश्वनाथ श्मशान घाट पहुंचीं और पिता की चिता को मुखाग्नि दी। घाट पर मौजूद विधायक मनोज तिवारी, पूर्व सभासद अशोक पांडेय, जिला बार एसोसिएशन अध्यक्ष शेखर लखचौरा, पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष महेश परिहार और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी ने कहा कि बेटियों ने जो हिम्मत दिखाई है वह अन्य बेटियों के लिए भी प्रेरणादायी है। इधर केवल सती, त्रिलोचन जोशी, आरपी जोशी, स्वप्निल पांडे, अशोक पंत आदि ने पांडे के निधन पर शोक जताया है।
बेटियों के आगे आने से खत्म होगी रुढि़वादी सोच
अल्मोड़ा। सुनीता पांडे ने कहा कि बेटियां भी किसी से कम नहीं होती हैं। पिता का अंतिम संस्कार कर उन्होंने अपना फर्ज निभाया है। भावना और भारती ने कहा कि बेटियों के आगे आने से समाज की रुढि़वादी सोच खत्म होगी। संवाद