मैनपुरी जेल से फरार कुख्यात अपराधी राजेंद्र सिंह उर्फ डाक्टर ने 2005 में छह अन्य बदमाशों के साथ रानीखेत की अदालत में पेशी से लौटते वक्त फिल्मी अंदाज में तीन पुलिस कर्मियों की उन्हीं की राइफल से गोली मारकर हत्या कर दी थी। रौंगटे खड़ी कर देने वाली इस वारदात को अंजाम देने के बाद राजेंद्र सहित सातों बदमाश हथकडि]यों समेत फरार हो गए थे। कुछ साल बाद राजेंद्र सिंह यूपी में किसी अन्य अपराध में पकड़ा गया। तमाम वारदातों में इस शातिर बदमाश को दोहरे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, लेकिन एक बार फिर वह मैनपुरी जेल से फरार हो गया।
भिकियासैंण के गांव सैनार चौडिय़ापट्टी (भिकियासैंण) निवासी राजेंद्र सिंह पुत्र जमन सिंह शातिर बदमाश रहा है। वह पढ़ा लिखा भी है। उसके पिता ने उसे तब यूपी के एक प्राइवेट आयुर्वेदिक इंस्टीट्यूट में डाक्टरी के कोर्स के लिए दाखिला दिलाया था, लेकिन पढ़ाई को बीच में छोड़कर वह अपराध जगत में प्रवेश कर गया। उसे डाक्टर के उर्फ नाम से भी जाना जाता है। 2005 से पहले हत्या के एक मामले में वह अल्मोड़ा जेल में बंद था। जेल में उन दिनों कुछ अन्य शातिर बदमाश भी कैद थे। 15 जनवरी 2005 को राजेंद्र सिंह और छह अन्य बदमाशों को तीन पुलिस कर्मी पेशी के लिए रानीखेत की अदालत में ले गए थे। इस बीच कुख्यात राजेंद्र सिंह और उसके अन्य साथी बदमाशों ने पुलिस कर्मियों को ठिकाने लगाने की योजना तैयार कर ली।
एक टाटा सूमो में रानीखेत से लौटते वक्त पुलिस कर्मी आगे की सीटों में बैठे जबकि राजेंद्र सिंह सहित कुछ अन्य बदमाश पीछे की सीट में बैठ गए। रानीखेत-अल्मोड़ा मार्ग में अल्मोड़ा से करीब 18 किमी पहले क्वैराली के पास पीछे की सीट में बैठे राजेंद्र सिंह और उसके साथियों ने पुलिस कर्मियों को दबोच लिया और उनकी राइफलों से ही तीन पुलिस कर्मियों गिरीश चंद्र, महेश सिंह और संजय कुमार की हत्या कर दी। इसके बाद शातिर राजेंद्र सिंह के साथ ही हरीश सिंह, इम्तियाज खान, मो. इजरायल, कैलाश सिंह रावत, मिर्जा और सुल्तान सभी बदमाश हथकड़ियों समेत फरार हो गए। इस वारदात को अंजाम देने के पीछे पीछे राजेंद्र सिंह का ही शातिर दिमाग था। टाटा सूमो चालक ने किसी तरह भागकर जान बचाई और उसी ने बाद में घटना की जानकारी पुलिस प्रशासन को दी। काफी दिनों बाद तक राजेंद्र सिंह समेत भागे हुए शातिर बदमाशों का पता नहीं चल सका। कई साल बाद राजेंद्र सिंह उर्फ डाक्टर किसी अन्य मामले में यूपी में धरा गया था। बताया गया है कि वह पिछले कई सालों से मैनपुरी जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था, लेकिन सोमवार को जब जेल कर्मी होली मना रहे थे तभी वह कुछ अन्य अपराधियों के साथ दिन दहाड़े जेल से फरार हो गया।