मेडिकल कॉलेज बनने के बाद उम्मीद जगी, भूमि नहीं मिलने से अधर में मामला
हेमंत बिष्ट
अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय में तीन बड़े सरकारी अस्पताल हैं लेकिन अभी तक बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की सुविधा सपना है। इसका निस्तारण उधारी पर चल रहा है। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद इस सुविधा के मिलने की उम्मीद अवश्य जगी थी लेकिन इसके लिए जमीन उपलब्ध नहीं होने से मामला अधर में है।
बेस अस्पताल, जिला अस्पताल और महिला अस्पताल के बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण उधारी पर चल रहा है। गदरपुर की एक निजी संस्था को इसका ठेका दिया गया है। समय पर इसका निस्तारण नहीं होने का खतरा तब ज्यादा बढ़ जाता है, जब इन अस्पतालों में उपचार या ऑपरेशन के दौरान खतरनाक और त्वरित संक्रमण फैलाने वाला बायो मेडिकल वेस्ट निकलता है। ऐसे में पर्यावरण और जन स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ने का अंदेशा बना रहता है।
जब मेडिकल कॉलेज अस्तित्व में आया था तो बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की उम्मीद जगी थी लेकिन तीन साल से ज्यादा होने के बाद भी स्थिति जस की तस है।
जिले में हैं सैकड़ों अस्पताल
अल्मोड़ा। जिले में करीब 300 सरकारी अस्पताल और 67 निजी क्लीनिक हैं। इसमें में एक जिला चिकित्सालय, दो उप चिकित्सालय, नौ सीएचसी और सात बी टाइप सीएचसी, 58 ए टाइप सीएचसी, 204 उपकेंद्र स्थित हैं।
कोट
बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण की समस्या जिले में बनी है। वर्तमान में सभी अस्पताल अपने स्तर से गदरपुर की संस्था के माध्यम से यह निस्तारण कर रहे हैं। शासन को इसके लिए प्रस्ताव भेजे जाते रहे हैं। -डॉ. आरसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा