इसी चट्टान पर बने हैं शैल चित्र।
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लखुडियार में प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्र देखरेख के अभाव में खराब होने लगे हैं। प्राचीन शैलचित्रों में बारिश के दौरान पानी रिसने की समस्या बनी हुई है। दो माह बाद बरसात का मौसम शुरु होने वाला है। अगर इस अवधि में इन दुर्लभ शैलचित्रों को सुरक्षित रखने या इनके रखरखाव के लिए ठोस इंतजाम नहीं किए गए तो आगे यह महत्वपूर्ण धरोहर बरबाद हो सकती है।
बाड़ेछीना के पास लखुडियार में एक चट्टान में बने शैलचित्रों को काफी दुर्लभ माना जाता है। प्रागैतिहासिक काल में बनाए गए इन चित्रों में लाल रंग की कई मानवाकृतियां आदि बनी हैं। जिस प्राकृतिक चट्टान में ये शैलचित्र बने हुए हैं उसके ऊपर कुछ पेड़ भी हैं। तेज बारिश होने पर चट्टान से इन शैलचित्रों में पानी रिसाव होने लगता है।
कुछ समय पूर्व पुरातत्व विभाग और वन विभाग की टीम ने लखुडियार का संयुक्त मौका मुआयना भी किया था। दुर्लभ शैलचित्रों के महत्व को देखते हुए पुरातत्व विभाग के अधिकारी पिछले एक साल से भारतीय पुरातत्व विज्ञान शाखा देहरादून को कई बार पत्र भेज चुके हैं। इसके अलावा महानिदेशक पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग नई दिल्ली को भी पत्राचार किया जा चुका है लेकिन विज्ञान शाखा की ओर से इसमें कोई रुचि नहीं ली जा रही है। उत्तराखंड में विद्यमान इन शैलचित्रों को समय रहते सुरक्षित नहीं किया गया तो प्रागैतिहासिक काल के शैलचित्र भविष्य में खराब हो सकते हैं। इधर क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इस संबंध में देहरादून स्थित भारतीय पुरातत्व विज्ञान शाखा से शैलचित्रों को सुरक्षित करने के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है।