पुस्तकालय में अध्ययन करते युवा।
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एक तरफ भटके कुछ युवा नशे के आदी बन कर अपनी जिंदगी से खिलवाड़ करने में लगे हैं तो दूसरी तरफ जिला पुस्तकालय में हर रोज आने वाले छात्र-छात्राओं बढ़ती संख्या बता रही कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर अपने भविष्य को बनाने में जुटे हैं। लाइब्रेरी आने वाले स्कूल और कालेज के होनहार छात्र घंटे, दो घंटे तक संबंधित विषय के बारे में पढ़कर अपना ज्ञान बढ़ा रहे हैं।
पिछले कुछ सालों से युवाओं में नशाखोरी एक बीमारी के रूप में पनप रही है। जिसमें कुछ अराजक तत्व स्थानीय युवाओं और स्कूली बच्चों को शामिल कर उन्हें बुरी लत के आदी बना रहे हैं। पुलिस के अभियान के बाद ऐसे कई युवाओं की पहचान भी उजागर हुई है जो सभ्य समाज से आते हैं, लेकिन अभिभावकों और स्कूल प्रशासन के नियंत्रण के अभाव में भटके युवा बगैर सोचे समझे इस दलदल की ओर बढ़ रहे हैं। इसके बावजूद समाज के युवाओं का कुछ वर्ग ऐसा भी है। जो इन सबसे से हटकर किताबों में अपना भविष्य खोज रहा है। इसका जीता जागता सबूत जीआईसी रोड के पास स्थित अंग्रेजों के समय का बना पुस्तकालय है। जहां हर रोज करीब 60 से 70 युवा घंटे, दो घंटे अध्ययन करने पहुंच रहे हैं। पुस्तकालय में इतिहास, भूगोल, विज्ञान, हिंदी, धर्म, अर्थ से संबंधित विषयों की किताबों के अलावा कवियों, साहित्यकारों, कथाकारों और प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित करीब 50 हजार पुस्तकें हैं।
इसके अलावा समाज सुधारक रहे राजाराम मोहन रॉय लाइब्रेरी फाउंडेशन कोलकाता से भी हर साल यहां करीब 1000 तक विभिन्न विषयों की किताबें आती हैं। जिला पुस्तकालय के प्रभारी महेंद्र सिंह ने बताया कि पुस्तकालय आने वाले अधिकतर लोगों में शोध छात्र, स्कूली बच्चे और कालेज के छात्र शामिल हैं, जो अखबार के अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं, विज्ञान, हिंदी आदि से संबंधित पुस्तकों की मांग करते हैं। इसके अलावा कई युवा इतिहास और स्वामी विवेकानंद से संबंधित पुस्तकों के भी शौकीन हैं।