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दिल्ली, अमेरिका में बैठकर गाने से कुछ नहीं होगा

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सेवानिवृत्त ले. जनरल एमसी भंडारी। - फोटो : amar ujala
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 प्रदेश में पलायन को लेकर तेज होती बहस के बीच सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एमसी भंडारी ने पलायन रोकने के लिए अपनी निशुल्क सेवाएं  देने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी की पहल का स्वागत तो किया है, परंतु साथ ही कहा है कि सिर्फ गांव में जाकर वोट देने से कुछ हासिल नहीं हो पाएगा। इसके लिए जमीनी स्तर पर कार्ययोजना बनानी पड़ेगी। 

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उन्होंने कहा कि हिमाचल के पूर्व सीएम परमार की तरह उत्तराखंड के सीएम को भी देहरादून छोड़कर गांव की तरफ रुख करना होगा। पहाड़ पर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का जाल बिछाना होगा। अमेरिका या दिल्ली में बैठकर बेडूपाको गाने से कुछ नहीं होगा। यदि पहाड़ की चिंता है तो पहाड़ की तरफ रुख करना ही होगा। प्रदेश की बड़ी हस्तियां जब पीड़ा से रूबरू होंगी तो फिर समाधान तलाशना और आसान होगा।

अमर उजाला से विशेष बातचीत में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल भंडारी ने कहा कि जिस प्रदेश में 19 सालों में 11 बार मुख्यमंत्री बदल गए हों, उस प्रदेश की स्थिति को खुद ही समझा जा सकता है। हालत यह है कि प्रत्येक सीएम का ध्यान विकास के बजाय कुर्सी बचाने की तरफ ही देखा गया है।
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सबसे पहले इस बात पर मंथन होना चाहिए कि लोग आखिर घर गांव छोड़कर क्यों जा रहे हैं। असल में गांव स्तर पर मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के साथ ही रोजगारपरक छोटे उद्योगों की स्थापना की जरूरत है। जब युवाओं को अपने घर पर ही आमदनी होने लगेगी तो फिर वे शहरों में धक्के खाने क्यों जाएंगे।उन्होंने कहा पलायन एक गंभीर विषय है यदि इस पर समय रहते अंकुश नहीं लगा तो स्थिति बेकाबू हो जाएगी। 
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उन्होंने उत्तराखंडियों का डाटा बैंक बनाकर उसकी मदद से लोगों से संपर्क कर उन्हें वापस पहाड़ लाने के लिए प्रेरित करने की बात कही है। 

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