रानीखेत (अल्मोड़ा)। 44 किमी लंबे द्वारसों-काकड़ीघाट मोटर मार्ग का निर्माण कार्य 43 साल बाद भी पूरा नहीं हुआ है। डामरीकरण की मांग भी पूरी नहीं हो पाई है। जिसके चलते न तो इस मोटर मार्ग में 108 एंबुलेंस आती है और ना ही रसोई गैस सिलेंडरों का वाहन। आधे अधूरे मोटर मार्ग का मनबजूना, तुरकौड़ा, कारखेत, उरोली, भैंसोली सहित दो दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि सभी गांवों की दूरी तहसील मुख्यालय से 40 से 50 किमी है।
मालूम हो कि मनबजूना, तुरकौड़ा, कारखेत, उरोली, भैंसोली, टनवाणी, सिमोली, भैंसोली, देहोली, कालनू सहित तहसील मुख्यालय के दूरस्थ गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए 1973 में द्वारसों-काकड़ीघाट 44 किमी मोटर मार्ग को स्वीकृति मिली। 1978 तक यह मोटर मार्ग टनवाणी तक 10 किमी कट चुका था। इसके बाद लंबे प्रयास हुए, 1981-82 तक शेष मोटर मार्ग का कटान भी हो चुका था, लेकिन डामरीकरण नहीं हो सका है। इसके लिए ग्रामीण विभागों के चक्कर तक काट चुके हैं। डामरीकरण नहीं होने से मार्ग की हालत खराब है। पूरे मार्ग में बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं।
जिस कारण रसोई गैस सिलेंडरों का वाहन और 108 एंबुलेंस तक इस सड़क पर नहीं जाती। ग्रामीण वाहनों को बुक कराकर बमुश्किल रोगियों को अस्पताल पहुंचाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता मोहन सिंह बोरा, पुष्पा देवी, खुशाल सिंह, नरसिंह, विशन सिंह ने बताया कि सबसे पुराने मोटर मार्ग में डामरीकरण का कार्य नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है। अब लोनिवि के अधिकारियों का कहना है कि इसे पीएमजीएसवाई को हस्तांतरित कर दिया गया है। इस अवधि में कई सरकारें आई और चली गई हैं, लेकिन किसी का भी ध्यान इस सड़क पर नहीं गया।