अल्मोड़ा। नगर में लावारिस कुत्तों और बंदरों से निजात मिलने की उम्मीद कम है। यहां कुत्तों के बधियाकरण के लिए पंजीकृत संस्थाएं नहीं मिल रहीं हैं तो बंदरों के बधियाकरण के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। ऐसे में इनकी आबादी लगातार बढ़ रही है और लोग इनके हमले का शिकार होकर अस्पताल की दौड़ लगाने को मजबूर हैं। दरअसल कुत्तों का बधियाकरण पशु कल्याण बोर्ड से अधिकृत और पंजीकृत संस्थाएं ही कर सकती हैं।
नगर में लावारिस कुत्तों की बढ़ती आबादी रोकने के लिए पालिका ने इनके बधियाकरण की योजना बनाते हुए पंजीकृत संस्थाओं से आवेदन मांगे। दो साल में तीन बार विज्ञप्ति निकालने के बाद भी एक भी संस्था ने आवेदन नहीं किया और पालिका को मायूस होना पड़ा। हालात यह हैं कि नगर में लावारिस कुत्तों की आबादी एक हजार से अधिक पहुंच गई हैं। आबादी बढ़ने से इन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है और ये हिंसक हो गए हैं। बीते तीन महीने में लावारिस कुत्तों के हमले में 303 लोग अस्पताल पहुंचे हैं। शाम होते ही लोग नगर की गलियों में अकेले आवाजाही करने से डरने लगे हैं लेकिन इनके आतंक से निजात दिलाने के उपाय किसी के पास नहीं हैं।
बंदरों के बधियाकरण के लिए नहीं हैं विशेषज्ञ
अल्मोड़ा। नगर में बंदरों से सुरक्षा की जिम्मेदारी पालिका की है तो ग्रामीण क्षेत्रों में वन विभाग की। दोनों ही इनके बधियाकरण के लिए विशेषज्ञों की कमी से जूझ रहे हैं। दो साल पूर्व बंदरों के बधियाकरण में पारंगत भवाली में तैनात पशु चिकित्सक के माध्यम से इस काम को अंजाम दिया था। एक साल पूर्व उनका स्थानांतरण होने से पालिका, वन विभाग के साथ ही जिले के लोगों की दिक्कत बढ़ गई है। बंदरों की आबादी लगातार बढ़ रही है। पर्याप्त भोजन न मिलने से ये लोगों पर हमला करने के साथ ही खेती को भी उजाड़ रहे हैं।
दो साल पूर्व 981 कुत्तों का हुआ बधियाकरण
अल्मोड़ा। दो साल पूर्व पालिका ने कुत्तों के बधियाकरण का अभियान चलाया। किसी तरह पशु कल्याण बोर्ड में पंजीकृत दिल्ली की संस्था ने तब पालिका का साथ देते हुए 981 कुत्तों का बधियाकरण किया। तब से पालिका का साथ देने के लिए पंजीकृत संस्थाएं किनारा कर रही हैं, जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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पशु कल्याण बोर्ड से पंजीकृत संस्थाएं हीं कुत्तों का बधियाकरण कर सकती हैं। लगातार विज्ञप्ति निकालने के बाद भी संस्थाएं आवेदन नहीं कर रहीं। बंदरों को पकड़ने के साथ उनका बधियाकरण जरूरी है, लेकिन इसके लिए यहां विशेषज्ञ नहीं हैं।
भरत त्रिपाठी, ईओ, नगर पालिका, अल्मोड़ा।
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भवाली में तैनात पशु चिकित्सक कुत्तों और बंदरों का बधियाकरण में पारंगत थे। जिनका एक साल पूर्व स्थानांतरण हो गया। तब से यहां इस कार्य के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं। वन विभाग के पास भी विशेषज्ञों की कमी है।
डॉ. उदयशंकर, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, अल्मोड़ा।