रानीखेत (अल्मोड़ा)। पहाड़ों की शांति, सकून और हरियाली के लिए मशहूर अल्मोड़ा जिले के जंगल अब नशेड़ियों और अराजक तत्वों के मौज-मस्ती और पार्टी करने का ठिकाना बनते जा रहे हैं। नशेड़ी और अराजक लोग यहां शराब और नशे के साथ जश्न मनाते हैं। वनों में ही आग जलाकर खाना बनाते हैं और जाते समय खाली बोतलें, प्लास्टिक और कूड़ा वहीं बिखेरकर चले जाते हैं। इससे न केवल वनों में आग लगने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि वनों की सुंदरता और सुरक्षा को भी खतरा बना है।
जाड़े का सीजन होने के बावजूद कुछ दिन पहले अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले में वनाग्नि की घटनाएं हो भी चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर जिला मुख्यालय से लगे जंगलों में हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नशेड़ियों और अराजक लोगों की यह हरकत वनों में रह रहे वन्य प्राणियों के लिए तो परेशानी पैदा कर ही रही है, साथ ही इससे शांति और सकून के लिए जंगल जाने वालों को दिक्कत हो रही है। सरकार और कुछ सामाजिक संस्थाएं स्वच्छता अभियान चला रही हैं वहीं कुछ लोग अब भी प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे। इसका असर पर्यटन पर भी दिखने लगा है। कई सैलानी जो सुकून की तलाश में जंगलों का रुख करते हैं, वहां कचरा देखकर निराश होकर लौट जाते हैं।
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वनों में खाना बनाते समय आग बन जाती है विनाश की वजह
जंगलों में पार्टी के दौरान आग जलाना वन संपदा, वन्य प्राणियों और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सूखी पत्तियां और घास में आग पलभर में सुलगकर भयंकर रूप ले लेती है, जो कई हेक्टेयर जंगल को तबाह कर देती है। इससे वन्यजीवों का आवास नष्ट होता है। आग की चपेट में आकर कई दुर्लभ प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसी लापरवाही नहीं रुकी, तो आने वाले वर्षों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ना तय है। संवाद
स्वच्छता अभियान की पोल खोलती रही है गंदगी
स्वच्छ भारत मिशन और स्थानीय सफाई अभियानों के बावजूद जंगलों की हालत सुधर नहीं पा रही। कई बार स्कूली बच्चे और समाजसेवी संगठन सफाई अभियान चलाकर प्लास्टिक, बोतलें और कचरा इकट्ठा करते हैं, लेकिन कुछ ही दिनों में हालात फिर वैसे ही हो जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सफाई अभियान नहीं, बल्कि लोगों के व्यवहार और सोच में बदलाव जरूरी है। कड़ी निगरानी, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई ही इस समस्या पर अंकुश लगा सकती है।
बोले लोग-
मैं रोज शाम को प्रकृति की शांति महसूस करने जंगल जाता हूं, लेकिन अब हर जगह टूटी बोतलें और कचरे के ढेर दिखते हैं। कई बार खुद सफाई करता हूं पर कुछ समय बाद हालात जस के तस हो जाते हैं।
सुरेंद्र सिंह जलाल, स्थानीय निवासी
हम यहां प्रकृति की सुंदरता देखने आए थे, लेकिन जगह-जगह शराब की बोतलें और प्लास्टिक देखकर मन खिन्न हो गया। ऐसा लगता है जैसे लोगों को प्रकृति की कोई परवाह नहीं।
विनय कुशवाहा, पर्यटक
पहाड़ों की खूबसूरती को यूं बिगाड़ना बेहद दुखद है। वन विभाग को निगरानी बढ़ानी चाहिए और जो लोग कचरा फैलाते हैं, उन पर सख्त जुर्माना लगाना चाहिए।
दीपांकर यादव, पर्यटक
जंगलों में छोड़ी गई शराब की बोतलें और प्लास्टिक वन्यजीवों के लिए जानलेवा हैं। टूटे कांच से जानवर घायल हो सकते हैं और प्लास्टिक निगलने से उनकी मौत भी हो सकती है। यह सिर्फ गंदगी नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
जंगलों में कचरा फैलाना, शराब पार्टी करना और आग जलाना पर्यावरण के लिए खतरनाक होने के साथ ही वन अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी। लोगों से जंगलों की स्वच्छता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग की अपील है।