फोटो- 25एएलएम01पी- पंतकोटुली के जंगल में पड़ी शराब की बोतल व अन्य कूड़ा। संवाद
रानीखेत (अल्मोड़ा)। पहाड़ों की शांति, सुकून और हरियाली के लिए मशहूर अल्मोड़ा जिले के जंगल अब नशेड़ियों और अराजक तत्वों के मौज-मस्ती और पार्टी करने का ठिकाना बनते जा रहे हैं। नशेड़ी और अराजक लोग यहां शराब और नशे के साथ जश्न मनाते हैं।
वनों में ही आग जलाकर खाना बनाते हैं और जाते समय खाली बोतलें, प्लास्टिक और कूड़ा वहीं बिखेरकर चले जाते हैं। इससे न केवल वनों में आग लगने से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है, बल्कि वनों की सुंदरता और सुरक्षा को भी खतरा बना है। जाड़े का सीजन होने के बावजूद कुछ दिन पहले अल्मोड़ा और बागेश्वर जिले में वनाग्नि की घटनाएं हो भी चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर जिला मुख्यालय से लगे जंगलों में हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नशेड़ियों और अराजक लोगों की यह हरकत वनों में रह रहे वन्य प्राणियों के लिए तो परेशानी पैदा कर ही रही है, साथ ही इससे शांति और सकून के लिए जंगल जाने वालों को दिक्कत हो रही है।
सरकार और कुछ सामाजिक संस्थाएं स्वच्छता अभियान चला रही हैं वहीं कुछ लोग अब भी प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे। इसका असर पर्यटन पर भी दिखने लगा है। कई सैलानी जो सुकून की तलाश में जंगलों का रुख करते हैं, वहां कचरा देखकर निराश होकर लौट जाते हैं।