चौबटिया का प्रख्यात उद्यान गार्डन देसी-विदेशी सैलानियों की पसंदीदा जगह है। साल भर यहां देशी-विदेशी पर्यटकों का तांता लगा रहता है, लेकिन पर्यटकों के लिए सुविधाएं नहीं होने से वे मायूस होकर लौटते हैं। सबसे बड़ी समस्या शौच की है। यहां बने दोनों शौचालय बदहाल हैं। सफाई की भी नियमित व्यवस्था नहीं है। चौबटिया की डेलीसेस सेब प्रजाति इस क्षेत्र की शान समझी जाती थी, लेकिन एक दशक पूर्व इस प्रजाति के पेड़ काट दिए जाने से अब यहां डेलीसेस सेब की खुशबू नहीं महकती, पर्यटकों को इसकी भारी कमी खलती है।
उत्तर प्रदेश शासनकाल के दौरान पंडित जीबी पंत ने पर्वतीय क्षेत्र के काश्तकारों को औद्यानीकरण से जोड़ने के लिए 1953 में चौबटिया में उद्यान निदेशालय की स्थापना की। 106.91 हेक्टेयर भूमि में फैले इस निदेशालय में रिसर्च सेंटर भी स्थापित किया गया। उद्यान की स्थापना के बाद से ही यह स्थल पर्यटकों की पसंदीदा जगह रही है। रानीखेत पहुंचते ही पर्यटक गोल्फ मैदान और चौबटिया उद्यान गार्डन के बारे में जानकारी चाहते हैं। तब इस गार्डन में डेलीसेस, रॉयमर, फेनी, रेड गोल्ड, गोल्डन वैली जैसी स्वदेशी डेलीसस प्रजाति के सेबों का उत्पादन होता था।
इन सेबों की लालिमा और खुशबू से ही पर्यटक आकर्षित होता था, लेकिन 2003-04 में अमेरिकन सेब के चक्कर में पुराने सेब के पेड़ काट दिए गए, जिस कारण पर्यटकों का रुझान घटा है। पर्यटकाें को गाइड करने के लिए उद्यान विभाग के पास अपनी कोई व्यवस्था नहीं है। दूसरी तरफ गार्डन में शौच की सुविधा नहीं है। दो शौचालय बनाए गए हैं, लेकिन वह भी बदहाल पड़े हुए हैं, वाहन पार्किंग स्थल पर जगह-जगह कूड़ा बिखरा रहता है। पानी की भी दिक्कत रहती है। स्थानीय नागरिकों ने बताया कि गार्डन की शुरुआत में ही यदि खूबसूरत फूल, पौधे लगाए जाएं तो इससे पर्यटकों की आमद बढ़ेगी।