आजादी के आंदोलन में सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सालम के स्वतंत्रता सेनानियों के गांव आजादी के 70 साल बाद भी उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं। इन गांवों में सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और संचार सुविधा भी नहीं है। गांव के लोगों को नकदीकी स्टेशन पहुंचने के लिए पांच से आठ किमी पैदल चलना पड़ता है।
सालम के स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह धौनी, नैन सिंह समेत कई क्रांतिकारियों का आजादी की लड़ाई में अहम योगदान रहा है। आजादी के 70 सालों बाद भी स्वतंत्रता सेनानी राम सिंह धौनी का गांव विनौला, नैन सिंह का बसगांव सड़क, स्वास्थ्य, बिजली, पानी आदि सुविधाओं से वंचित हैं। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम सिंह धौनी के गांव के ग्रामीण पांच किमी और नैन सिंह के गांव बसगांव के ग्रामीण आठ किमी पैदल चलकर नकदीकी बस स्टेशन पहुंचते हैं। इन गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए कई बार सर्वे हुआ, लेकिन इससे आगे कार्रवाई नहीं बढ़ सकी है। सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को कई बार गंभीर रोगियों को सड़क में पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि राजनेताओं और नौकरशाही की उपेक्षा के कारण इन गांवों की यह दशा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि हर साल 25 अगस्त के दिन शहीद स्थल धामद्यो में नेताजी क्षेत्र के विकास के लिए बड़े-बड़े वायदे करते हैं, किंतु उन पर आज तक अमल नहीं हो पाया है। क्षेत्र पंचायत सदस्य धना धौनी ने बताया कि कुछ साल पहले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राम सिंह धौनी के गांव बिनौला के लिए थुवासिमल-बिनौला सड़क का कटान हुआ, लेकिन निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पाया है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के गांवों को शीघ्र सड़क से जोड़ने की मांग की है।