लोगों को बेहतर सुविधा देने के उद्देश्य से सरकार ने 1987 में जिला मुख्यालय में बेस अस्पताल की स्थापना की, लेकिन सुविधाओं के अभाव में अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
अस्पताल में कई विशेषज्ञ डाक्टरों के पद खाली हैं। सफाई व्यवस्था ठेकेदार के हवाले है, लेकिन अस्पताल के शौचालयों में गंदगी व्याप्त है। सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं हैं। अस्पताल के दोमंजिले में स्थित वार्ड में मवेशी तक घुस आते हैं।
बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम ने बेस अस्पताल का जायजा लिया। 11:05 बजे पर्ची काउंटर में मरीजों की भीड़ लगी थी। अब तक 50 से अधिक मरीजों ने पर्चे कटाए थे।
11:10 बजे फिजिशियन का कक्ष बंद था। पूछने पर अस्पताल प्रशासन ने बताया कि वह छुट्टी पर हैं। जिन मरीजों ने फिजिशियन को दिखाने के लिए पर्चे काटे थे उन्हें नाक कान गला विशेषज्ञ डा. एचसी गड़कोटी देख रहे थे।
चेस्ट फिजिशियन का कक्ष खुला था। बताया गया कि चेस्ट फिजिशिन छुट्टी पर हैं। दूसरे नाक, कान गला विशेषज्ञ का कक्ष खुला था, लेकिन वह 12:17 बजे अपने कक्ष में मौजूद नहीं थे।
हालांकि उनके कक्ष के बाहर कोई मरीज भी नहीं था। 12:20 बजे इसी भवन के एक कक्ष में मरीजों की काफी भीड़ थी। पूछने पर बताया गया कि आज अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस पर कैंप लगा है। लोगों का परीक्षण किया जा रहा है।
दूसरे भवन में 12:25 बजे एक्स-रे कक्ष में तकनीशियन एक मरीज का एक्स-रे कर रहे थे। सुबह से 12 लोगों के एक्स-रे हो चुके हैं। 12:30 बजे गेवापानी के ग्रामीण गंभीर रूप से घायल महिला मुन्नी देवी (35) को स्ट्रेचर में सिटी स्कैन कराने लाए थे।
इसी दौरान तकनीशियन एक अन्य रोगी का सिटी स्कैन कर रहे थे। 12:35 बजे अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भी मरीजों की भीड़ लगी थी। कक्ष सहायक लोगों के नाम पुकार रहे थे। भीतर डाक्टर लोगों के अल्ट्रासाउंड कर रहे थे। इस समय तक 15 लोगों को अल्ट्रासाउंड किए जा चुके थे।
अमर उजाला की टीम एक बजे जनरल वार्ड में पहुंची। वार्डों के शौचालयों में गंदगी से दुर्गंध उठ रही थी। दो मंजिले में वार्ड के भीतर एक गाय घुस आई थी। जबकि नर्सें बाहर धूप सेंक रही थीं। हालांकि कुछ देर के बाद स्वास्थ्य कर्मियों ने गाय को वार्ड से बाहर किया।
बेस अस्पताल परिसर में मेडिकल कालेज के भवनों का निर्माण हो रहा है। अस्पताल के भवनों का भी जीर्णोद्धार किया जा रहा है। प्राइवेट, पेइंग वार्ड, आर्थोपेडिक वार्ड के भवनों का सुधारीकरण कार्य चल रहा है। अस्पताल परिसर में जगह-जगह निर्माण सामग्री पड़ी हुई है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अमर उजाला में बेस अस्पताल की सिटी स्कैन मशीन खराब होने की खबर प्रमुखता से छपने के बाद जिला और अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। अब सिटी स्कैन मशीन ठीक करा दी गई है और इससे मरीजों को सुविधा हो रही है।
जिले में केवल बेस अस्पताल में ही सिटी स्कैन की सुविधा है। यहां अल्मोड़ा के अलावा बागेश्वर, पिथौरागढ़ और गढ़वाल के जिलों से भी मरीज उपचार कराने पहुंचते हैं। पिछले करीब ढाई माह से सिटी स्कैन मशीन खराब पड़ी थी। मरीजों को हल्द्वानी और अन्य मैदानी शहरों में जाना पड़ रहा था।
जिसमें मरीजों का काफी समय और पैसा बरबाद हो रहा था। 14 नवंबर को अमर उजाला ने इस संबंध में प्रमुखता से खबर छापी थी। इसके बाद जिला प्रशासन हरकत में आया।
जिलाधिकारी के निर्देश पर प्रबंध समिति ने निदेशालय से अनुमोदन लिया। इसके बाद 2,32,836 रुपये खर्च कर मशीन काम करने लगी है। गुरुवार को एक बजे तक पांच लोगों के सीटी स्कैन हो चुके थे।